अगर अब कुछ ठीक रहा तो 2030 तक भारत मलेरिया मुक्त देश बन सकता है , 2015 और 2025 के बीच मलेरिया के मामलों और मौतों में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आई है, उच्च असर वाले जिलों की संख्या 155 से घटकर 33 हुई
2030 तक भारत को मलेरिया-मुक्त बनाने की प्रगति को गति देने के लिए केंद्रित, क्षेत्र-विशेष रणनीतियाँ और मजबूत निगरानी आवश्यक हैं: श्रीमती आराधना पटनायक, अपर सचिव एवं मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम)
विजय सिंह ठाकुर
नई दिल्ली: प्रवक्ता.कॉम 28 अगस्त 2026
देश से मलेरिया को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में हुई एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट किया गया है कि व्यापक जांच के दौरान सामने आने वाले बिना लक्षण (असिम्प्टमैटिक) वाले मामलों को अलग से दर्ज किया जाना चाहिए। इन्हें एपीआई (वार्षिक परजीवी सूचकांक) और एबीईआर (वार्षिक रक्त परीक्षा दर) की गणना से बाहर रखा जाना चाहिए, ताकि देश में मलेरिया की वास्तविक स्थिति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रदर्शन का सटीक मूल्यांकन हो सके।
अंतर-क्षेत्रीय तालमेल और बहु-विभागीय सहयोग पर जोर
बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी श्रीमती आराधना पटनायक ने मलेरिया नियंत्रण के लिए विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अकेले स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से मलेरिया को फैलने से नहीं रोका जा सकता। इसके लिए जलभराव रोकने, मच्छरों के प्रजनन स्रोतों को खत्म करने और पर्यावरण प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा।
राज्यों को यह सलाह दी गई है कि वे वेक्टर-नियंत्रण और पर्यावरणीय उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ग्रामीण विकास, शहरी विकास विभागों और पंचायती राज संस्थाओं के साथ अपने समन्वय को और मजबूत करें।
जन-भागीदारी और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा
मलेरिया के खिलाफ जंग को जन-आंदोलन बनाने के लिए जमीनी स्तर पर जन-भागीदारी बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। इसके तहत निम्नलिखित गतिविधियों में तेजी लाने को कहा गया है:
बुखार के मामलों की त्वरित और समय पर सूचना देना।
जलभराव और अन्य जगहों की पहचान कर मच्छर के लार्वा व स्रोतों को नष्ट करना।
इन कार्यों में स्वयं सहायता समूहों (SHGs), सामुदायिक स्वयंसेवकों और पंचायती राज प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
प्रमुख अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री प्रभाकर, वीबीडी के संयुक्त सचिव श्री निखिल गजराज, एनसीवीबीडीसी की निदेशक डॉ. तनु जैन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के मिशन निदेशक सहित विभिन्न राज्यों के राज्य कार्यक्रम अधिकारी, जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिला मलेरिया अधिकारी शामिल हुए।






