PVTG समूह के अभ्यर्थियों को डी.एड. और टी.ई.टी. से छूट 5000 नवीन शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए DPI के प्रस्ताव पर शासन की मुहर सेवारत शिक्षकों ने कहा टीईटी अनिवार्यता से हमें भी मिले छूट

रायपुर प्रवक्ता. कॉम 4 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग (मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर) ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए 5000 शिक्षकीय पदों पर नवीन भर्ती के संबंध में प्रशासनिक सहमति प्रदान कर दी है.

जारी आदेश के अनुसार, PVTG (विशेष पिछड़ी जनजाति) समूह के सहायक शिक्षक पद के अभ्यर्थियों को विभाग के राजपत्र दिनांक 10.01.2013 के प्रावधानों के तहत डी.एड. (D.Ed.) एवं टी.ई.टी. (T.E.T.) की अनिवार्य अर्हताओं से छूट दे दी गई है. इस छूट के मिलने के बाद अब ये अभ्यर्थी CGSSB के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे. यह आदेश छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव आर.पी. वर्मा द्वारा 03 अगस्त 2026 को जारी किया गया है.
शिक्षक संगठनों का रुख और नई मांग
शासन द्वारा PVTG समूह के अभ्यर्थियों को दी गई इस छूट का विभिन्न शिक्षक संगठनों ने स्वागत किया है। इसके साथ ही, संगठनों ने यह मांग भी उठाई है कि इसी तर्ज पर सेवारत शिक्षकों को भी टीईटी (T.E.T.) से छूट प्रदान की जानी चाहिए।
क्या है PVTG जानें
PVTG का पूरा नाम Particularly Vulnerable Tribal Group (विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह) है। यह भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जनजातियों (ST) के भीतर मौजूद सबसे पिछड़े, संवेदनशील और कमज़ोर उप-समूहों को दिया गया एक प्रशासनिक वर्गीकरण है।
पहले इन्हें ‘प्रिमिटिव ट्राइबल ग्रुप’ (Primitive Tribal Group – PTG) कहा जाता था, वर्ष 2006 में सरकार ने इनका नाम बदलकर ‘PVTG’ कर दिया।
इन समूहों की मुख्य विशेषताएँ और पहचान के आधार:
भारत सरकार या ढेबर आयोग द्वारा इन समूहों की पहचान निम्नलिखित पैमानों पर की जाती है:
- कृषि-पूर्व तकनीक:
- कृषि के आधुनिक तरीकों के बजाय आज भी पुरानी या प्राथमिक पद्धतियों (जैसे- शिकार, वनोपज संग्रहण, या शुरुआती खेती) पर निर्भरता।
- स्थिर या घटती जनसंख्या:
- जनसंख्या में वृद्धि न होना या उसका कम होना।
- अत्यधिक कम साक्षरता:
- अन्य जनजातीय समूहों की तुलना में शिक्षा का स्तर बेहद कम होना।
- निर्धनता और पिछड़ापन:
- अर्थव्यवस्था का स्तर बेहद बुनियादी होना।
स्थिति:
पूरे देश में केंद्र सरकार द्वारा कुल 75 PVTGs को मान्यता दी गई है (जो 18 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश अंडमान-निकोबार में फैले हैं)।
छत्तीसगढ़ राज्य में अबूझमाड़िया, बैगा, बिरहोर, कमार, पहाड़ी कोरवा, भुंजिया और पंडो जैसे प्रमुख विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह (PVTGs) निवास करते हैं
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