2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से राहत की मांग: तमिलनाडु की राह पर म.प्र., अब छत्तीसगढ़ पर टिकी निगाहें शिक्षक संगठन को सरकार पर बढ़ाना होगा दबाव
तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित हालिया प्रस्ताव के बाद अब मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार से विशेष सत्र बुलाने का अनुरोध किया है। इस घटनाक्रम के बाद अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या छत्तीसगढ़ सरकार भी अपनी विधानसभा में ऐसा ही प्रस्ताव ला सकती है?
रायपुर/भोपाल: प्रवक्ता.कॉम 2 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों की सेवा निरंतरता और पदोन्नति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब यह मांग तूल पकड़ने लगी है कि पुरानी नियुक्तियों को TET से छूट दी जाए। तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित हालिया प्रस्ताव के बाद अब मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार से विशेष सत्र बुलाने का अनुरोध किया है। इस घटनाक्रम के बाद अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या छत्तीसगढ़ सरकार भी अपनी विधानसभा में ऐसा ही प्रस्ताव ला सकती है?
तमिलनाडु, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में क्या कुछ चल रहा है
1.50 लाख शिक्षकों का भविष्य दांव पर:
मध्य प्रदेश में TET की अनिवार्यता के कारण लगभग 1.50 लाख शिक्षकों और उनके परिवारों की सेवा-निरंतरता, पदोन्नति और अन्य लाभ प्रभावित हो रहे हैं।
तमिलनाडु मॉडल की चर्चा:
तमिलनाडु विधानसभा ने 25 अगस्त 2026 को एक प्रस्ताव पारित कर 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट देने और उनके सेवा हितों के संरक्षण का निर्णय लिया है।
मध्यप्रदेश में विशेष सत्र की मांग:

मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तमिलनाडु की तर्ज पर शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया है।
छत्तीसगढ़ में क्या बन सकती है स्थिति?
2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के हितों को लेकर पड़ोसी राज्यों में उठ रही आवाज़ का असर छत्तीसगढ़ पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ में भी पुरानी सेवा वाले शिक्षकों की पदोन्नति और TET छूट की मांग को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ सकती है।
क्या छत्तीसगढ़ में भी आ सकता है प्रस्ताव?
मध्यप्रदेश में उठे इस सियासी और प्रशासनिक मुद्दे के बाद छत्तीसगढ़ के शिक्षक संघों की निगाहें भी राज्य सरकार पर टिक गई हैं। यदि मध्यप्रदेश सरकार तमिलनाडु की तरह विधानसभा में प्रस्ताव लाती है, तो छत्तीसगढ़ सरकार पर भी अपने यहाँ के पुराने शिक्षकों को राहत देने के लिए इसी प्रकार का प्रस्ताव लाने का दबाव बढ़ेगा।






