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उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी जल विवाद सुलझाने बड़ी पहल दिल्ली में हुई बड़ी बैठक

ओडिशा ने वर्ष 2016 में सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2018 में अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया।

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 31 अगस्त 2025

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भारत की एक प्रमुख नदी, महानदी, जो छत्तीसगढ़ से निकलकर ओडिशा होकर बंगाल की खाड़ी तक जाती है, लंबे समय से विवाद का कारण बनी हुई है।
इस लंबे विवाद को बातचीत से हल करने के लिए 30 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में एक अहम बैठक हुई। इसमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्य सचिवों और जल संसाधन विभाग के सचिवों ने हिस्सा लिया। बैठक में दोनों राज्यों ने माना कि यह समस्या बहुत पुरानी और कठिन है, लेकिन लोगों और दोनों राज्यों के भले के लिए इसका समाधान मिल-बैठकर निकालना ही होगा।

क्या है जल विवाद –

ओडिशा और छत्तीसगढ़ ने महानदी जल विवाद को ‘सौहार्दपूर्ण’ ढंग से सुलझाने की इच्छा व्यक्त की। 2016 में, निचले तटवर्ती राज्य ओडिशा ने छत्तीसगढ़ पर ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में एकतरफा कई बैराज बनाने का आरोप लगाया था, जिससे गैर-मानसून मौसम में जल प्रवाह कम हो गया था। दोनों राज्यों के बीच कोई औपचारिक अंतर-राज्यीय जल बंटवारा समझौता नहीं है। ओडिशा ने वर्ष 2016 में सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2018 में अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया


बैठक में यह भी तय हुआ कि सितंबर 2025 से दोनों राज्यों की तकनीकी समितियाँ, जिनमें इंजीनियर और विशेषज्ञ होंगे, हर हफ़्ते बैठक करेंगी। ये समितियाँ मुख्य मुद्दों को पहचानेंगी और उनका हल निकालने की कोशिश करेंगी। साथ ही, वे यह भी देखेंगी कि कैसे दोनों राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।
अक्टूबर 2025 में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव एक और बैठक करेंगे। इसमें जल संसाधन सचिव भी शामिल होंगे। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो दिसंबर तक दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री भी मुलाक़ात कर सकते हैं और आगे की दिशा तय करेंगे।


अंत में दोनों राज्यों ने यह वादा किया कि वे ईमानदारी और खुले मन से बातचीत करेंगे, ताकि महानदी जल विवाद का हल ऐसा निकले जो सबके लिए लाभकारी हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पहल सफल रही, तो यह न सिर्फ ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल होगी कि बड़े और पुराने विवाद भी आपसी बातचीत और सहयोग से सुलझाए जा सकते हैं।

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