नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ की नई पहचान! शुरू होगी कॉफी की खेती, ओडिशा के कोरापुट में ट्रेनिंग लेंगे छत्तीसगढ़ के अफसर
कॉफी बोर्ड की हरी झंडी: अबूझमाड़ की मिट्टी कॉफी के लिए बेस्ट, 4 साल में शुरू होगा उत्पादन; चाय की खेती की भी तैयारी
रायपुर प्रवक्ता .कॉम 6 जुलाई 2026
रायपुर/नारायणपुर: छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़, जो कभी अपनी भौगोलिक दुर्गमता के लिए जाना जाता था, अब देश के नक्शे पर एक बड़ी कृषि-क्रांति का गवाह बनने जा रहा है। जिला प्रशासन की एक अनूठी पहल के तहत अब अबूझमाड़ के घने जंगलों में बड़े पैमाने पर कॉफी की खेती शुरू करने की तैयारी कर ली गई है। इस परियोजना से न सिर्फ पर्यावरण का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों की आय भी कई गुना बढ़ जाएगी।
इस महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कलेक्टर नारायणपुर ने भारत सरकार के कॉफी बोर्ड के विशेषज्ञों के साथ कुतुल, कच्चापाल, कोडलियार, ईरकभट्टी और तोके सहित कई सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का विस्तृत जमीनी दौरा किया है।
जलवायु और मिट्टी कॉफी के लिए परफेक्ट
दौरे पर आए कॉफी बोर्ड के विशेषज्ञ दल ने क्षेत्र की मिट्टी, तापमान, वार्षिक वर्षा और समुद्र तल से ऊंचाई का वैज्ञानिक अध्ययन करने के बाद पुष्टि की है कि अबूझमाड़ का प्राकृतिक वातावरण कॉफी उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यहाँ ‘कॉफी आधारित कृषि वानिकी मॉडल’ विकसित किया जाएगा, जिससे वनों को नुकसान पहुंचाए बिना पेड़ों की छांव में कॉफी के पौधे उगाए जाएंगे।
4 साल में उत्पादन, पीढ़ियों तक मिलेगी स्थायी आय
विशेषज्ञों के अनुसार, कॉफी के पौधों का करीब चार वर्षों तक रख-रखाव करने के बाद कमर्शियल प्रोडक्शन (व्यावसायिक उत्पादन) शुरू हो जाता है। एक बार उत्पादन शुरू होने के बाद यह स्थानीय ग्रामीणों के लिए पीढ़ी-दर-पीढ़ी नियमित कमाई का जरिया बनेगा।
- रोजगार की गारंटी: इस पूरी परियोजना में स्थानीय स्व-सहायता समूहों (SHGs) और ग्रामीणों को सीधे जोड़ा जाएगा।
- नर्सरी की शुरुआत: शुरुआती चरण में जमीनों का चयन कर प्लांटेशन और स्थानीय स्तर पर ही नर्सरी तैयार करने का काम शुरू किया जा रहा है।
- लक्ष्य यह है कि प्रभावित क्षेत्र के हर परिवार के कम से कम एक सदस्य को रोजगार मिल सके।
ओडिशा के कोरापुट में ट्रेनिंग लेंगे छत्तीसगढ़ के अफसर
कॉफी की खेती को तकनीकी रूप से सफल बनाने के लिए नारायणपुर कलेक्टर ने जिले के कृषि अधिकारियों और कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण के लिए ओडिशा के कोरापुट भेजने के निर्देश दिए हैं। ये अधिकारी कोरापुट में कॉफी उत्पादन, पौध प्रबंधन और उसकी बारीकियों को सीखेंगे, ताकि वापस लौटकर अबूझमाड़ के स्थानीय किसानों को सही मार्गदर्शन दे सकें।
भविष्य में चाय की खेती की भी उम्मीद
विशेषज्ञ दल के साथ चर्चा के दौरान एक और दिलचस्प बात सामने आई है कि अबूझमाड़ की खूबसूरत वादियां चाय की खेती के लिए भी उतनी ही उपयुक्त हैं। इसे देखते हुए कलेक्टर ने भविष्य की संभावनाओं के लिए एक चरणबद्ध कार्ययोजना (Phase-wise Action Plan) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यानी आने वाले दिनों में बस्तर की कॉफी के साथ-साथ अबूझमाड़ की चाय भी देश-दुनिया में धूम मचा सकती है।
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण दौरे के दौरान भारत सरकार कॉफी बोर्ड (आंध्र प्रदेश और कोरापुट) के आला अधिकारियों सहित जिले के उप संचालक कृषि और जल संसाधन विभाग के अभियंता मुख्य रूप से मौजूद थे।






