छत्तीसगढ़:शिक्षकों की पदोन्नति में टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ फेडरेशन का मोर्चा, शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन विभागीय टेट की मांग

रायपुर प्रवक्ता. कॉम 13 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत सहायक शिक्षकों और शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर असमंजस और निराशा का माहौल गहराता जा रहा है। हाल ही में विभागीय बैठकों में पदोन्नति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य बनाए जाने के फैसले के बाद, प्रदेश के शिक्षक संगठनों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी कड़ी में, 135 मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त संगठनों के प्रतिनिधि संगठन ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन’ ने स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री श्री गजेंद्र यादव को एक कड़ा ज्ञापन सौंपा है।


प्रचलित नियमों के विपरीत है निर्णय: फेडरेशन
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा और संरक्षक सुभाष मिश्र द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में यह स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान शिक्षक भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में टीईटी की अनिवार्यता का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। फेडरेशन का तर्क है कि विभागीय बैठक के आधार पर पदोन्नति में अचानक इस प्रकार की अतिरिक्त शर्त जोड़ना प्रचलित नियमों की मूल भावना के पूरी तरह विपरीत है।
वरिष्ठ शिक्षकों के अधिकारों पर संकट
ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि जिन शिक्षकों ने वर्षों तक निष्ठापूर्वक शासकीय सेवा की है, उन्हें केवल टीईटी उत्तीर्ण न होने के कारण पदोन्नति से वंचित करना या वरिष्ठता सूची में कनिष्ठ शिक्षकों से पीछे करना सरासर अन्याय है। इससे न केवल शिक्षकों के वरिष्ठता के अधिकार प्रभावित होंगे, बल्कि आने वाले समय में अदालती विवाद खड़े होने की भी पूरी संभावना है।
फेडरेशन की प्रमुख मांगें:
टीईटी अनिवार्यता तत्काल समाप्त हो:
शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया में टीईटी की शर्त को तुरंत प्रभाव से खारिज किया जाए।
वरिष्ठता के आधार पर हो पदोन्नति:
विभाग द्वारा तैयार वरिष्ठता सूची के आधार पर रिक्त पदों पर पात्र शिक्षकों की पदोन्नति अविलंब पूरी की जाए।
परीक्षा के लिए मिले समय-सीमा:
यदि टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए वर्ष 2028 तक का समय निर्धारित किया गया है, तो शिक्षकों को उस अवधि के भीतर परीक्षा पास करने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।
विभागीय टीईटी का आयोजन:
लोक शिक्षण संचालनालय के माध्यम से शीघ्र विभागीय टीईटी आयोजित हो ताकि सभी पात्र शिक्षक समयानुसार अपनी पात्रता पूरी कर सकें।
आरक्षण नियमों का पालन:
संपूर्ण पदोन्नति प्रक्रिया के दौरान नियमानुसार आरक्षण संबंधी प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया जाए।
कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने शासन से उम्मीद जताई है कि वह प्रदेश के हजारों शिक्षकों के हितों, उनके वरिष्ठता अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्द ही न्यायसंगत और सकारात्मक निर्णय लेगा।





