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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की बैंकों को चेतावनी बिना सहमति लोन के साथ बीमा, म्यूचुअल फंड जैसे प्रोडक्ट जबरन नहीं बेच सकेंगे बैंक

सेल्स कॉल, विजिट की टाइमिंग निर्धारित शाम 6 तक ही बैंक के कर्मचारी या सेल्स एग्जीक्यूटिव ग्राहक से अनुमति लेकर फोन कॉल या विजिट कर सकेंगे।

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 13 फरवरी 2026

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बैंक और गैर-बैंकिंग कंपनियां (एनबीएफसी) अब लोन के साथ बीमा और म्यूचुअल फंड जैसे थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स जबरन नहीं बेच सकेंगे। दरअसल, आरबीआई ने मिस-सेलिंग रोकने के लिए बुधवार को नए नियमों का मसौदा जारी किया। इसमें डार्क पैटर्न, जबरन बंडलिंग और बिना सहमति के बिक्री पर सख्त रोक लगाई गई है।

यह ड्राफ्ट सभी रेगुलेटेड एंटिटी यानी सामान्य कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, लोकल एरिया बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, शहरी सहकारी बैंक, ग्रामीण सहकारी बैंक, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस, एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां पर लागू होगा। हालिया मसौदे पर चार मार्च तक मिले सुझावों पर गौर करने के बाद अंतिम नियम जारी होंगे। इसी साल एक जुलाई से नियम लागू होने पर फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की बिक्री के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव नजर आएगा।

जुलाई से नए नियम लागू होने पर ये 5 बदलाव होंगे

जबरन बंडलिंग पर रोकः 1 कोई भी बैंक लोन जैसे अपने प्रोडक्ट के साथ इंश्योरेंस या म्यूचुअल फंड जैसे थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट जोड़कर नहीं बेच सकेंगे।

सहमति जरूरीः एक साथ 2 कई प्रोडक्ट्स के लिए

ग्राहक से कंसेंट नहीं ली जा सकेगी। सभी प्रोडक्ट के लिए अलग-अलग सहमति लेनी जरूरी होगी।

डार्क पैटर्न बंदः एप/3 वेबसाइट पर आम लोगों को गुमराह करने वाले डिजाइन या पहले से टिक बॉक्स जैसे तरीकों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

सेल्स कॉल, विजिट की टाइमिंग निर्धारित

शाम 6 तक ही बैंक के कर्मचारी या सेल्स एग्जीक्यूटिव ग्राहक से अनुमति लेकर फोन कॉल या विजिट कर सकेंगे।

फीस-चार्जः नए नियमों के मुताबिक, बैंक और एनबीएफसी 5 प्रमोशनल मटेरियल स्पष्ट और तथ्यात्मक होना चाहिए। इनमें फीस और सभी तरह के अन्य चार्ज की स्पष्ट जानकारी होगी।

सभी बैंक, एनबीएफसी के लिए समान फ्रेमवर्क

कौन सा फाइनेंशियल प्रोडक्ट किस तरह के ग्राहक के लिए उपयुक्त है, इसके नियम सीमित संस्थाओं में थे। समीक्षा में पाया गया कि थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स (जैसे म्यूचुअल फंड), एजेंटों की गतिविधियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न (ग्राहकों को अंजाने में गलत निर्णय लेने के लिए उकसाना) के जरिये मिस सेलिंग की शिकायतें बढ़ रही हैं। इसलिए सभी बैंक और एनबीएफसी के लिए एक-समान, व्यापक फ्रेमवर्क की जरूरत महसूस हुई।

ये फायदे होंगेः गलत प्रोडक्ट बेचने पर पैसा वापस, मुआवजा भी मिलेगा30 दिन में फीडबैंक अनिवार्यः बैंक और सभी वित्तीय संस्थाएं हर बिक्री के बाद ग्राहकों से अनिवार्य रूप से प्रतिक्रिया लेंगी।

मिस सेलिंग पर रिफंडः गलत या बिना सहमति के बिक्री साबित होने पर पूरा पूरा पैसा वापस करना होगा और मुआवजा देना होगा।पूरी पारदर्शिताः एजेंटों कीअपडेटेड लिस्ट वेबसाइट पर देनी होगी। बैंक परिसर में वे अलग पहचान में दिखेंगे।

RBI के गाइडलाइन के अनुसार 11 फरवरी 2026 को जारी

भारतीय रिज़र्व बैंक ने ‘विनियमित संस्थाओं द्वारा वित्तीय उत्पादों एवं सेवाओं का विज्ञापन, विपणन और विक्रय’ संबंधी संशोधन निदेश का मसौदा जारी किया
11 फरवरी 2026भारतीय रिज़र्व बैंक ने ‘विनियमित संस्थाओं द्वारा वित्तीय उत्पादों एवं सेवाओं का विज्ञापन, विपणन और
विक्रय’ संबंधी संशोधन निदेश का मसौदा जारी किया
वर्तमान में, बीमा एजेंसी कारोबार के संदर्भ में ग्राहक उपयुक्तता और अनुकूलता तथा अन्य संबंधित मामलों से संबंधित अनुदेश अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) और आवास वित्त कंपनियों को जारी किए गए हैं। समीक्षा करने के बाद यह निर्णय लिया गया है कि सभी बैंकों और एनबीएफसी को वित्तीय उत्पादों और सेवाओं (अन्य पक्षकार उत्पादों और सेवाओं सहित) के विज्ञापन, विपणन और विक्रय संबंधी व्यापक अनुदेश जारी किए जाए, जिसमें प्रत्यक्ष बिक्री एजेंट (डीएसए) / प्रत्यक्ष विपणन एजेंट (डीएमए) के कार्यकलाप, डार्क पैटर्न, अपविक्रय की रोकथाम आदि शामिल होंगे।2. तदनुसार, 6 फरवरी 2026 के विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य में की गई घोषणा के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज जन सामान्य से अभिमत के लिए निम्नलिखित संशोधन निदेशों के मसौदे जारी किए हैं, जिसके द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक के विनियमन विभाग द्वारा जारी मौजूदा निदेशों में संशोधन प्रस्तावित है।भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – दायित्वपूर्ण कारोबार आचरण) संशोधन निदेश, 2026

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