आज दूसरे दिन भी भीषण गर्मी मे लगे स्कूल शिक्षा विभाग के दावों की खुली पोल, ऑनलाइन सिस्टम ध्वस्त; ‘मेगा फजीहत’ के बाद अब शिक्षकों पर दबाव
डीपीआई से लेकर जेडी और डीईओ से लेकर बीईओ तक को जब पता था कि तैयारी ही पूरी नहीं हुई है, तो स्कूल खोलने की जल्दबाज़ी क्यों दिखाई गई । सारा दबाव शिक्षक झेल रहे , अफसर केवाल फरमान दे रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि पुस्तक स्कैन और यूनिफार्म वितरण में पूरा जून महीना लगेगा। मंत्री जी को क्या स्थिति की वास्तविक जानकारी नहीं पहुंचाई गई । तकनीकी खामी पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई।
रायपुर प्रवक्ता.कॉम 17 जून 2026
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा नए शैक्षणिक सत्र को लेकर की गई तैयारियों के दावों की पहले ही हफ्ते में हवा निकल गई है। प्रदेश में जारी भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच लगातार दूसरे दिन स्कूलों में अव्यवस्था का आलम रहा। विभाग की महत्वाकांक्षी ऑनलाइन योजनाएं तकनीकी खामियों की भेंट चढ़ चुकी हैं, जिससे पूरे प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की जबरदस्त किरकिरी (मेगा फजीहत) हो रही है।
‘Vsk’ और ‘TBC’ ऐप्स हुए ‘डब्बा’, ऑनलाइन सिस्टम फेल
विभाग ने बड़े जोर-शोर से डिजिटल हाजिरी और पारदर्शी वितरण के लिए ऐप्स लॉन्च किए थे, लेकिन धरातल पर ये बुरी तरह फ्लॉप साबित हुए हैं:
Vsk (विद्या समीक्षा केंद्र) ऐप की गड़बड़ी: शिक्षकों और विद्यार्थियों की ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज करने के लिए बनाया गया ‘Vsk ऐप’ लगातार दूसरे दिन भी ठप रहा। लॉगिन एरर और सर्वर क्रैश होने के कारण शिक्षक हाजिरी लगाने के लिए परेशान होते रहे।
TBC (टेक्स्ट बुक कॉरपोरेशन) ऐप की खामी: नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक और यूनिफॉर्म वितरण की मॉनिटरिंग के लिए तैयार ‘TBC ऐप’ में भी गंभीर तकनीकी खराबी आ गई है। स्थिति यह है कि जमीनी स्तर पर किताबें और यूनिफॉर्म समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं और न ही ऐप में एंट्री हो पा रही है।
भीषण गर्मी में जहां पूरा ध्यान बच्चों की सेहत और सुचारू पढ़ाई पर होना चाहिए, वहां शिक्षक नेटवर्क ढूंढने और खराब ऐप्स पर माथापच्ची करने में व्यस्त हैं।”
यूनिफॉर्म और पुस्तक वितरण योजना धड़ाम
सत्र की शुरुआत में ही शत-प्रतिशत बच्चों को किताबें और यूनिफॉर्म बांटने का दावा करने वाले अफसरों के हाथ-पांव फूल गए हैं। डिजिटल ट्रैकिंग के चक्कर में पूरी वितरण व्यवस्था ही चरमरा गई है। धरातल पर योजनाएं बुरी तरह फेल नजर आ रही हैं, जिसने कागजी तैयारियों के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलकर रख दी है।
अपनी नाकामी छिपाने रायपुर जेडी (संयुक्त संचालक) बना रहे शिक्षकों पर प्रेशर!
सूत्रों के मुताबिक, ऑनलाइन सिस्टम के फेल होने और अपनी फजीहत से बौखलाए विभाग के आला अधिकारी अब सारा ठीकरा जमीनी अमले यानी शिक्षकों पर फोड़ रहे हैं। रायपुर जेडी कुछ स्कूलों में विजिट किया गया जहां उन्होंने शिक्षकों को बुक स्कैनिंग में आ रही दिक्क्तों के बावजूद उन पर दबाव देते हुए नाराजगी व्यक्त करने की सूचना मिली है , विभागीय ग्रुप्स और मौखिक निर्देशों के जरिए शिक्षकों पर अनावश्यक मानसिक दबाव (प्रेशर) बनाने की खबरें गर्म हैं। शिक्षकों का कहना है कि जब विभाग का सर्वर और ऐप ही काम नहीं कर रहा, तो उन पर कार्रवाई की धौंस दिखाना सरासर गलत और तानाशाही रवैया है।
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि करोड़ों रुपये फूंककर बनाए गए ये ऐप अगर सत्र की शुरुआत में ही बैठ गए, तो आईटी सेल और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? क्या भीषण गर्मी में परेशान हो रहे शिक्षकों को इस मानसिक प्रताड़ना से राहत मिलेगी?






