ममता सरकार के फैसलों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ पद की शपथ लेते ही शुभेंदु अधिकारी के ताबड़तोड़ बड़े फैसले 45 दिन में देंगे बीएसएफ को जमीन
मदरसों में वंदे मातरम् गाना अनिवार्य, सभी तरह के धार्मिक भत्ते बंद
प्रवक्ता.कॉम 22 मई 2026
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की नई सरकार बनते ही एक्शन मोड में आ गई है। 9 मई 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद, शुभेंदु अधिकारी ने कैबिनेट बैठकों में पूर्ववर्ती ममता बनर्जी (TMC) सरकार की नीतियों और फैसलों को पूरी तरह से पलटना शुरू कर दिया है।
अपनी पहली और दूसरी कैबिनेट बैठक में ही निर्णायक फैसलों की झड़ी

शुभेंदु सरकार ने सीमा सुरक्षा, केंद्रीय योजनाएं, आरक्षण और तुष्टिकरण के मुद्दों पर ऐसे कई कड़े फैसले लिए हैं, जिन्होंने बंगाल की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है।
TMC सरकार के इन बड़े फैसलों को बदला
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कार्यभार संभालते ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कई विवादित और केंद्रीय योजनाओं को रोकने वाले फैसलों को पूरी तरह से निरस्त या संशोधित कर दिया है:
1. बांग्लादेश सीमा पर BSF को जमीन हस्तांतरण
ममता सरकार और केंद्र के बीच सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकार क्षेत्र और सीमा पर फेंसिंग (बाड़ लगाने) के लिए जमीन देने को लेकर लंबा विवाद चल रहा था। शुभेंदु कैबिनेट ने अपनी पहली ही बैठक में बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के काम को पूरा करने के लिए BSF को तत्काल जमीन ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी। इसे घुसपैठ पर कड़े प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।
2. राज्य की OBC सूची रद्द और धर्म-आधारित योजनाएं बंद
ममता सरकार की ओबीसी सूची रद्द
ममता सरकार के समय बनी राज्य की ओबीसी (OBC) सूची को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के आए फैसले के अनुरूप नई सरकार ने मौजूदा राज्य ओबीसी सूची को पूरी तरह रद्द कर दिया है।
अब एक नए पैनल का गठन किया जाएगा जो तय करेगा कि आरक्षण की पात्रता किसे मिलनी चाहिए।
इसके साथ ही, कैबिनेट ने सूचना एवं सांस्कृतिक विभाग और अल्पसंख्यक मामलों के विभाग द्वारा धार्मिक आधार पर दी जाने वाली सभी विशेष सरकारी सहायताओं व योजनाओं को जून से बंद करने का आदेश दिया है।
3. 1.69 करोड़ जाति प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच
TMC सरकार के 2011 में सत्ता में आने के बाद से अब तक जारी किए गए करीब 1.69 करोड़ SC, ST और OBC प्रमाणपत्रों की दोबारा री-वेरिफिकेशन (सत्यापन) के आदेश दिए गए हैं। सरकार को शिकायतें मिली थीं कि ‘द्वारे सरकार’ कैंपों के माध्यम से बड़े पैमाने पर फर्जी सर्टिफिकेट बांटे गए थे।
4. भारतीय न्याय संहिता (BNS) और जनगणना को मंजूरी
ममता सरकार ने केंद्र के नए आपराधिक कानूनों (भारतीय न्याय संहिता – BNS) को राज्य में पूरी तरह लागू करने में हीला-हवाली की थी। नई सरकार ने इसे पूरी तरह बंगाल में लागू करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही राज्य में रुकी हुई जनगणना (Census) प्रक्रिया को तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
बंगाल में लागू कीं मोदी की गारंटियां
ममता सरकार ने केंद्र की जिन महत्वाकांक्षी योजनाओं को पश्चिम बंगाल में एंट्री नहीं दी थी, उन्हें शुभेंदु सरकार ने हरी झंडी दिखा दी है:
योजना / फैसला क्या बदला और नया क्या है?
आयुष्मान भारत योजना ममता सरकार की ‘स्वास्थ्य साथी’ की जगह अब बंगाल के गरीबों को ₹5 लाख का मुफ्त केंद्रीय इलाज मिलेगा।
अन्नपूर्णा योजना ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना (₹1500) की जगह अब महिलाओं को 1 जून से ₹3,000 प्रति माह की वित्तीय सहायता मिलेगी।
महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा राज्य की सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त सफर को मंजूरी दी गई है।
सरकारी नौकरी की उम्र सीमा बढ़ी युवाओं के लिए बड़ा फैसला लेते हुए ग्रुप-A के लिए उम्र सीमा बढ़ाकर 41 वर्ष और ग्रुप C व D के लिए 45 वर्ष कर दी गई है।
7वां राज्य वेतन आयोग राज्य कर्मचारियों और शिक्षा संस्थानों के स्टाफ के लिए 7वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी गई है।
तुष्टिकरण पर कड़ा रुख: “पिछली सरकार ने संविधान और राज्य की जनता के साथ विश्वासघात किया था। महिलाओं के आरक्षण को रोकने के लिए जानबूझकर जनगणना को रोक कर रखा गया। हमारी सरकार बंगाल के विकास और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, और राज्य में अब ‘तुष्टिकरण नहीं, सुशासन’ का राज होगा।” — शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल
शुभेंदु अधिकारी के इन शुरुआती और ताबड़तोड़ फैसलों ने साफ कर दिया है कि वे बंगाल की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था का पूरी तरह से शुद्धिकरण (Overhaul) करने के मूड में हैं। आने वाले दिनों में पुलिस और नौकरशाही में भी बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है।





