संसदीय समिति – मुख्य सचिव नहीं हुए पेश छात्रवृत्ति में देरी, 6 राज्यों के सीएस पर विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई होगी

नई दिल्ली
प्रवक्ता.कॉम 16 अक्टूबर 2026
अनुसूचित जाति (एससी) के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति वितरण में हो रही भारी देरी और अनियमितताओं को लेकर संसद की लोक लेखा समिति (पीएससी) ने सख्त रुख अपनाया है। समिति के समक्ष पेश न होने पर छह राज्यों के मुख्य सचिवों (सीएस) के खिलाफ विशेषाधिकार हनन के तहत कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।
मुख्य समाचार विवरण
अनुसूचित जाति (एससी) के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलने में वर्षों की देरी और इसके वितरण में पाई गई व्यापक अनियमितताओं को लेकर लोक लेखा समिति (पीएससी) ने कड़ा रुख दिखाया है। समिति द्वारा उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, ओडिशा, बिहार और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिवों को मौखिक साक्ष्य दर्ज कराने के लिए तलब किया गया था, लेकिन इनमें से कोई भी मुख्य सचिव समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। इस अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए समिति ने विशेषाधिकार हनन का मामला उठाते हुए इसे लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष ले जाने का निर्णय लिया है।
समिति ने गुरुवार को प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की।
लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष उठाया मामला
समिति इस पूरे मामले को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के संज्ञान में लाई है और विशेषाधिकार संबंधी नियमों के तहत उचित कार्रवाई की मांग की है।
समीक्षा में उजागर हुईं गंभीर खामियां
पीएससी अध्यक्ष के सी वेणुगोपाल ने बताया कि समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति की बकाया राशि पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति
इसमें विद्यार्थियों को 48 महीने तक की देरी का सामना करना पड़ा।
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति
इसमें 89 महीने तक की देरी दर्ज की गई।
पात्रता में अनिमियत्ताएँ
कई पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति की राशि मिली ही नहीं।
इसके अलावा, लेखा-परीक्षा (ऑडिट) के दौरान छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया में आय और जाति संबंधी पात्रता के सत्यापन में भी कई गंभीर खामियां और गड़बड़ियां उजागर हुई हैं।





