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सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों, दैनिक वेतनभोगियों , और संविदा कर्मचारियों द्वारा पुरानी सेवा को पेंशन के लिए ‘अर्हक सेवा’ में जोड़ने के संबंध छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का आदेश कोई अपवाद नहीं बल्कि स्थापित न्यायिक दृष्टांत है

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 8 अगस्त 2026

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देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों, दैनिक वेतनभोगियों , और संविदा कर्मचारियों द्वारा पुरानी सेवा को पेंशन के लिए ‘अर्हक सेवा’ में जोड़े जाने को लेकर समय-समय पर महत्वपूर्ण निर्णय दिए गए हैं।

​इस विषय पर विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों के प्रमुख रुख और निर्णय

​ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय

दैनिक वेतनभोगियों और नियमितीकरण का मामला: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी अपनी नियमित नियुक्ति से पहले वर्षों तक दैनिक वेतनभोगी या वर्क-चार्ज ) कर्मचारी के रूप में सेवा दे चुका है, तो नियमितीकरण के बाद पेंशन लाभ के लिए उसकी उस पुरानी सेवा को भी जोड़ा जाना चाहिए। कोर्ट ने माना कि केवल इस आधार पर पुरानी सेवा को नहीं नकारा जा सकता कि कर्मचारी शुरू में अस्थायी था।

शिक्षक (एलबी संवर्ग) मामला:

हालांकि, शिक्षा विभाग और स्थानीय निकायों के अंतर्गत पूर्व में नियुक्त शिक्षकों (शिक्षाकर्मी से शिक्षक बने संवर्ग) की पेंशन गणना के लिए पुरानी सेवा को प्रथम नियुक्ति तिथि से जोड़ने की मांग पर कोर्ट और शासन स्तर पर कानूनी लड़ाई जारी है, जहां अदालत ने पूर्व में प्रशासनिक और नियोक्ता के विवेक पर भी टिप्पणियां की हैं।

​इलाहाबाद उच्च न्यायालय (- उत्तर प्रदेश)

अस्थायी और वर्क-चार्ज सेवा की गणना:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने कई फैसलों में यह माना है कि यदि कोई कर्मचारी लंबे समय तक अस्थायी, तदर्थ (Ad-hoc) या वर्क-चार्ज के रूप में सेवा देने के बाद नियमित हुआ है, तो उसकी उस सेवा को पेंशन के लिए कुल अर्हक सेवा (Qualifying Service) में शामिल किया जाना अनिवार्य है।

पुरानी पेंशन योजना (OPS) और नीतिगत टिप्पणियां:

कोर्ट ने कर्मचारियों की पुरानी सेवा और पुरानी पेंशन बहाली से जुड़े मामलों में कई बार राज्य सरकारों के रवैए पर कड़ी टिप्पणी करते हुए यह रेखांकित किया है कि लंबी सेवा के बाद कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा (पेंशन) से वंचित नहीं किया जा सकता।

​ पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय

अग्र्रहण/अधिग्रहित संस्थाएं :

इस हाईकोर्ट ने निजी या सहायताप्राप्त कॉलेजों/संस्थाओं के सरकारीकरण के बाद वहां के कर्मचारियों की पुरानी सेवा को पेंशन लाभ के लिए जोड़ने का स्पष्ट आदेश दिया है अदालत का यह रुख रहा है कि यदि संस्था का अधिग्रहण सार्वजनिक हित में या सरकार द्वारा किया गया है, तो कर्मचारियों को पिछली सेवा के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

स्वायत्त निकाय और पीएसयू:

कोर्ट ने माना है कि यदि कोई कर्मचारी राज्य के नियंत्रित स्वायत्त निकाय या सार्वजनिक उपक्रम से सेवा छोड़कर सरकारी सेवा में आया है, तो नियमों के तहत उसकी पिछली सेवा को पेंशन के लिए जोड़ा जाना चाहिए बशर्ते पूर्व नियोक्ता से टर्मिनल लाभ का हिसाब-किताब तय नियमों के तहत हुआ हो।

​ मद्रास, कर्नाटक और अन्य उच्च न्यायालय (

प्रोजेक्ट या सहायता प्राप्त सेवा:

मद्रास और कर्नाटक हाईकोर्ट के कई मामलों में (जैसे आईसीएआर प्रोजेक्ट या सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में दी गई सेवा) यह निर्णय दिए गए हैं कि यदि कर्मचारी बाद में नियमित सरकारी सेवा में आ जाता है और पुरानी सेवा के दौरान नियमों का पालन हुआ है, तो उस समयावधि को पेंशन के प्रयोजन हेतु जोड़ने पर विचार किया जाना चाहिए।

​न्यायिक निर्णय के आधार

​देश के लगभग सभी उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित न्याय-दृष्टिक के अनुसार, सामान्यतः स्थापित न्यायिक सिद्धांत के आधार पर निर्णय दिए जाते हैं:

ब्रेक इन सर्विस न होना:

यदि पुरानी सेवा और नियमित सेवा के बीच कोई अनधिकृत या अवैध अंतराल (Break) नहीं है, तो पुरानी सेवा को अधिकांश मामलों में पेंशन के लिए योग्य माना जाता है।

वर्क-चार्ज और दैनिक वेतनभोगी:

जिन मामलों में कर्मचारियों ने बिना किसी त्रुटि के लंबी अवधि तक दैनिक वेतनभोगी या वर्क-चार्ज के रूप में काम किया और बाद में उनकी सेवाएं नियमित हुईं, वहां न्यायहित में अदालतों ने पुरानी सेवा को पेंशन की गणना में जोड़ने के पक्ष में आदेश दिए हैं।

विशिष्ट सेवा नियम:

हालांकि अंतिम निर्णय हमेशा संबंधित राज्य सरकार के विशिष्ट सेवा नियमों और उस विभाग की सेवा शर्तों के अधीन होते हैं, जिन्हें अदालतें अक्सर कर्मचारियों के पक्ष में उदारतापूर्वक व्याख्यायित करती हैं।

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