झीरम घाटी नरसंहार: 13 साल बाद न्याय , 29 लोगों की जान लेने वाले , 10 आरोपी नक्सलियों को NIA कोर्ट ने दी फांसी को मृत्युदंड

जगदलपुर/रायपुर: 16 सितम्बर 2026
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार मामले में जगदलपुर स्थित विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 10 दोषी पाए गए माओवादियों को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है। लगभग 13 साल तक चले लंबे न्यायिक ट्रायल और 290 से अधिक सुनवाइयों के बाद विशेष न्यायाधीश ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
किन धाराओं में कितनी सजा हुई
धाराएं:
अदालत ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र) के साथ-साथ गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराकर मृत्युदंड दिया।
दोषी व्यक्ति:
जिन 10 नक्सलियों को सजा सुनाई गई है, उनमें प्रमिला मोड़ियाम, सुमित्रा पुनेम, कोसा कवासी, मुक्का मंडावी, मरकामी देवा, आयत मरकाम, बाजामी सेना, चैतु लेकाम, जोगा मरकामी और महादेव नाग शामिल हैं।
मुकदमे की स्थिति:
इस केस में कुल 11 आरोपियों पर मुकदमा चल रहा था, जिनमें से 1 आरोपी की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी थी। एनआईए ने इस मामले में 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज कराए थे।
क्या था झीरम घाटी कांड?
25 मई 2013 को बस्तर जिले के दरभा घाटी स्थित झीरम क्षेत्र में नक्सलियों ने कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ के काफिले पर घात लगाकर भीषण हमला किया था। इस हमले में बारूदी सुरंग विस्फोट और अंधाधुंध गोलीबारी की गई थी।
हताहत:
हमले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर के नाम से मशहूर महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कुल 29 लोगों की मौत हुई थी।
इस हमले ने छत्तीसगढ़ के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व को भारी क्षति पहुंचाई थी।
अगला कदम
ट्रायल कोर्ट के नियमों के अनुसार मृत्युदंड की सजा की पुष्टि के लिए मामला उच्च न्यायालय (High Court) में भेजा जाएगा। बचाव पक्ष के पास फैसले के खिलाफ 30 दिनों के भीतर हाईकोर्ट में अपील करने का अधिकार है।





