
रायपुर प्रवक्ता. कॉम 16, जून 26
रायपुर: छत्तीसगढ़ में आज (16 जून) से नए शैक्षणिक सत्र का आगाज हो चुका है, लेकिन पहले ही दिन नौनिहालों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा। भीषण तपन के बीच स्कूलों के खुलने को लेकर अब शिक्षाविदों और पालकों के बीच गंभीर बहस छिड़ गई है।
बोर फेल, नलों में पानी नहीं: बदहाल व्यवस्था की खुली पोल
सत्र के पहले ही दिन प्रदेश के कई शासकीय स्कूलों की बुनियादी कमियों ने बच्चों की परेशानी को दोगुना कर दिया। कहीं पानी का मुख्य जरिया ‘बोरवेल’ जवाब दे चुका है, तो कहीं नलों से पानी गायब है। चिलचिलाती धूप में बच्चों को पीने के पानी और शौचालय के लिए भी भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। ऐसे में ‘शाला प्रवेश उत्सव’ का उत्साह उमस और पसीने में बह गया।
16 जून की तारीख अव्यावहारिक: शिक्षाविदों की दूरदर्शिता पर चर्चा
जून के इस पखवाड़े में जब सूर्य देवता अपने कड़े तेवर दिखा रहे हैं, तब 16 जून से स्कूलों का संचालन शुरू करने के फैसले को आम लोग और विशेषज्ञ पूरी तरह ‘अव्यावहारिक’ मान रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक लोग पहले के शिक्षाविदों की दूरदर्शिता को याद कर रहे हैं, जब ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद 1 जुलाई से स्कूल खुलते थे।
वरिष्ठ जानकारों का मानना है कि जुलाई की शुरुआत तक मानसून की सक्रियता से मौसम में थोड़ी नरमी आ जाती है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरित असर नहीं पड़ता। जून के मध्य में बिना पर्याप्त तैयारियों और मौसम के मिजाज को समझे स्कूल खोलना बच्चों को बीमारी के मुंह में धकेलने जैसा है।
छत्तीसगढ़ में आज का तापमान
गूगल वेदर (Google Weather) के अनुसार, छत्तीसगढ़ में आज का वर्तमान मौसम और तापमान कुछ इस प्रकार है:
वर्तमान तापमान: 39°C
महसूस होने वाला तापमान (Feels like): 43°C
मौसम की स्थिति: मुख्य रूप से धूप (Mostly Sunny)
आर्द्रता (Humidity): 32%
हवा: 2 mph, उत्तर-पश्चिम (Northwest) से
शिक्षकों का कहना है कि अगर सरकार जून के महीने में ही स्कूल खोलना अनिवार्य समझती है, तो कम से कम मौसम को देखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किया जाना चाहिए।
”दोपहर की तपन बच्चों के लिए जानलेवा”
शिक्षकों और प्राचार्यों का मानना है कि दोपहर 12 से 4 बजे के बीच गर्मी अपने चरम पर होती है। कई ग्रामीण और शहरी शासकीय स्कूलों में बिजली कटौती, पंखों की कमी और पानी की किल्लत जैसी समस्याएं आम हैं। ऐसी स्थिति में दोपहर के वक्त बच्चों को कक्षाओं में बिठाना उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ है।
शिक्षकों ने मांग रखी है कि:
सुबह 7:00 से 11:30 बजे तक ही स्कूलों का संचालन किया जाए।
इससे बच्चे दोपहर की भीषण तपिश और लू (Heat Wave) की चपेट में आने से बच सकेंगे।
सुबह के ठंडे माहौल में पढ़ाई भी बेहतर तरीके से हो पाएगी।
पालकों का भी मिल रहा समर्थन
शिक्षकों की इस मुहिम को पालकों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। अभिभावकों का कहना है कि दोपहर में जब बच्चे स्कूल से घर लौटते हैं, तो उनका चेहरा गर्मी से लाल रहता है और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का खतरा सबसे ज्यादा होता है। अगर स्कूल सुबह के वक्त लगेंगे, तो बच्चों को सुरक्षित घर वापस लाया जा सकेगा।
शिक्षकों का तर्क: “जब तक मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं हो जाता और तापमान में गिरावट नहीं आती, तब तक ‘मॉर्निंग स्कूल’ (Morning School) ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प है। शासन को बच्चों के हित में तुरंत यह आदेश जारी करना चाहिए।”
हमारे बच्चे बीमार हो रहे हैं, जिम्मेदार कौन?”
गुस्साए पालकों ने सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा:
”अगर इस जानलेवा गर्मी में बच्चों का स्कूल जाना इतना ही जरूरी है, तो खुद शिक्षा मंत्री या विभाग के बड़े अधिकारी किसी भी सरकारी स्कूल के कमरे में बिना कूलर और बिना पंखे के सिर्फ दो घंटे बैठकर दिखाएं। तब उन्हें समझ आएगा कि 42 से 45 डिग्री तापमान में मासूम बच्चे किस नरक को झेलने पर मजबूर हैं।”
पालकों का आरोप है कि कई सरकारी स्कूलों में बिजली की भारी कटौती हो रही है, कहीं पंखे खराब हैं, तो कहीं पीने के ठंडे पानी तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बच्चों को स्कूल बुलाना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
स्कूलों से आ रही हैं डराने वाली तस्वीरें
आज कई स्कूलों से बच्चों के चक्कर खाकर गिरने, नाक से खून बहने (नकसीर) और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के कारण बीमार होने की खबरें सामने आई हैं। दुर्ग जिले में बच्चा बेहोश हो गया।
- अभिभावकों का सवाल: “क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है? अगर किसी बच्चे को कुछ हो गया, तो क्या ये अधिकारी उसकी जिम्मेदारी लेंगे?”
- प्रबंधन पर निशाना: प्राशसन द्वारा केवल कागजी गाइडलाइंस जारी कर दी जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्कूलों में कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।
पालकों की प्रमुख मांगें
नाराज अभिभावक संघों ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं और चेतावनी दी है कि यदि जल्द फैसला नहीं बदला गया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे:
स्कूली छुट्टियां बढ़ाई जाएं: जब तक तापमान में गिरावट नहीं आती और मौसम सामान्य नहीं होता, तब तक स्कूलों को पूरी तरह बंद किया जाए।
ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प: यदि पढ़ाई का नुकसान हो रहा है, तो अस्थाई रूप से ऑनलाइन क्लासेज शुरू की जाएं।
समय में बदलाव (तत्काल प्रभाव से): अगर स्कूल खोलना बेहद जरूरी है, तो समय सुबह 7:00 बजे से सुबह 10:30 बजे तक का ही रखा जाए।





