RTE एक्ट में संशोधन ही टेट समस्या का एकमात्र समाधान केंद्रीय मंत्री ने कहा व्यवहारिक समाधान निकालेंगे नहीं जाएगी किसी की नौकरी

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 2025-26 के दौरान टीईटी (TET – Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता और सेवारत शिक्षकों (in-service teachers) के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण आश्वासन दिए हैं, जो मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के फैसले के बाद चर्चा में हैं।
सेवारत शिक्षकों को राहत का आश्वासन: प्रधान ने आश्वासन दिया है कि अनिवार्य टीईटी के कारण किसी भी वरिष्ठ या पहले से कार्यरत शिक्षक का कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा है कि शिक्षकों के पक्ष में जो भी कानूनी या नीतिगत कदम उठाने होंगे, केंद्र सरकार उठाएगी।
RTE एक्ट में संशोधन की संभावना: शिक्षक महासंघों (Teachers’ Federation of India) के साथ हुई बैठक में, प्रधान ने संकेत दिए हैं कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम की अनिवार्य टीईटी आवश्यकताओं की समीक्षा की जा सकती है ताकि उन शिक्षकों को राहत मिल सके जो 2010 से पहले नियुक्त हुए थे।
NCERT को निर्देश: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद NCTE और संबंधित विभागों को TET अनिवार्यता के मामले का समाधान खोजने के निर्देश दिए गए हैं।
पश्चिम बंगाल/अन्य राज्यों में आश्वासन: उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार सभी राज्यों में कार्यरत शिक्षकों के साथ खड़ी है, खासकर उन राज्यों में जहाँ TET को लेकर असमंजस की स्थिति है।
धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि सरकार शिक्षकों के साथ है और TET के कारण वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की नौकरी पर कोई खतरा नहीं आने दिया जाएगा। वे NCERT और NCTE के साथ मिलकर इस मामले में व्यावहारिक समाधान निकालने पर काम कर रहे हैं।





