टेट अनिवार्यता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे छत्तीसगढ़ सरकार आदेश के विरुद्ध 10 राज्यों की सरकार ने लगाई पुनर्विचार याचिका यूपी सीएम ने किया शिक्षकों का बचाव
सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीईटी अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश ,तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिसा, त्रिपुरा, आंध्रप्रदेश ,मेघालय, तेलंगाना और उत्तराखंड की सरकारों ने पुनर्विचार अपील की है। ऑल झारखंड प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन (AJPTA) और STFI (स्कूल टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी अपील याचिका लगाई है। छत्तीसगढ़ से भी याचिका लगाने की तैयारी कर रहे हैं संगठन
रायपुर प्रवक्ता कॉम 21 मार्च 2026
सुप्रीमकोर्ट के द्वारा 1 सितंबर 2025 को प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में अध्यापन करा रहे शिक्षकों के लिए शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत टीईटी परीक्षा पास करने का निर्णय दिया गया।
कोर्ट ने कहा
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने इस मामले में अपना निर्णय सुनाया. क्या है TET का नियम? इसके अनुसार कक्षा 1 से 8 तक छात्रों को पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य है.
इस निर्णय के आने बाद देश भर के शिक्षकों में से अपनी नौकरी को लेकर स्वाभाविक हड़कंप मचा हुआ है।
इस फैसले के विरुद्ध देश के कई राज्यों की सरकारों ने अपने शिक्षकों का बचाव करते हुए इस आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार अपील याचिका दायर कर दी है।
कौन कौन से राज्य जिन्होने लगाई पुनर्विचार अपील याचिका
सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीईटी अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश ,तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिसा, त्रिपुरा, आंध्रप्रदेश ,मेघालय, तेलंगाना और उत्तराखंड की सरकारों ने पुनर्विचार अपील की है।
छत्तीसगढ़ सरकार को भी शिक्षकों की चिंता करनी चाहिए –
इन राज्यों की ही तरह छत्तीसगढ़ में भी अस्सी हजार पांच सौ शिक्षक टीईटी के निर्णय से प्रभावित हैं । शिक्षकों के विभिन्न संगठनों को चाहिए कि वो सरकार से बात करके सुप्रीम कोर्ट में इस निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार अपील याचिका दायर करने के लिए चर्चा करें।
सरकार को भी 80 हजार शिक्षकों की योग्यता और चयन पर भरोसा करते हुए उनके और उनकी परिवार की चिंता करनी चाहिए।
विधानसभा में इस संबंध में सरकार ने विधायक के द्वारा पूछे गए प्रश्न का ठोस उत्तर नहीं दिया था केवल टीईटी प्रभावित शिक्षकों की संख्यात्मक जानकारी दी थी । टीईटी प्रभावित शिक्षकों के संबंध में सरकार की योजना की जानकारी नहीं दी थी।
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने टीईटी फैसले की अनिवार्यत
के फैसले के संबंध में शिक्षकों का किया बचाव उन्होंने इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से परीक्षण कर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार अपील करने का निर्देश देते हुए कहा कि
एक्स पर सी एम ने लिखा
बेसिक शिक्षा विभाग के सेवारत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता पर माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश का रिवीजन दाखिल करने का विभाग को निर्देश दिया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि प्रदेश के शिक्षक अनुभवी हैं और समय-समय पर सरकार द्वारा उन्हें प्रशिक्षण प्रदान किया जाता रहा है। ऐसे में उनकी योग्यता और सेवा के वर्षों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
शिक्षक संगठनों ने भी लगाई याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को फैसला सुनाया कि 5 वर्ष से अधिक सेवा शेष वाले सभी शिक्षकों को 2 साल में TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। ऑल झारखंड प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन (AJPTA) और अन्य संघों का तर्क है कि यह निर्णय 2010 की NCTE अधिसूचना का उल्लंघन करता है और पूर्व-प्रभाव से लागू होने के कारण अनुचित है ।
STFI (स्कूल टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी अपील याचिका लगाई है।
वर्तमान स्थिति: 26 फरवरी 2026 तक याचिकाएं दायर करने का सिलसिला जारी है। जब तक पुनर्विचार याचिका पर निर्णय नहीं आ जाता, तब तक 2 वर्ष की समय सीमा प्रभावी नहीं होगी।
शिक्षक संघ की मांग: शिक्षकों की मांग है कि पुरानी नियुक्तियों को इस अनिवार्य शर्त से बाहर रखा जाए और सरकार इस मामले में संवेदनशील निर्णय ले। छत्तीसगढ़ में किसी भी शिक्षक या शिक्षकों के संगठन ने इस संबंध में कोई याचिका नहीं लगाई है।






