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पंडरिया के जंगल में वन विभाग द्वारा ठीक होने की उम्मीद पर छोड़े गए राजकीय पशु गौर की हालत दिनों दिन हो रही है खराब चलने की हालत में भी नहीं

सीएम साय और वन मंत्री को मामले की जानकारी लेकर राजकीय पशु की जान बचाने के लिए वन विभाग को निर्देशित करना चाहिए , कुछ हुआ तो जवाबदेही किसकी ?

कबीरधाम /पंडरिया प्रवक्ता.कॉम 05 अप्रैल 2026

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पंडरिया-नगर से करीब 7 किलोमीटर दूर सगौना के जंगलों में घायल बायसन लगातार कमजोर होते जा रहा है।ज्ञात हो कि ग्राम सरहापथरा के कुछ ग्रामीणों ने पखवाड़े भर पहले उक्त बायसन को तीर से घायल कर दिया था।जिसका वन विभाग द्वारा उपचार कर जंगल मे छोड़ दिया गया था।किंतु इन उपचार से बायसन को लाभ होता नहीं दिख रहा है।उपचार के एक सप्ताह बाद बायसन को अब पहले से ज्यादा दिक्कत हो रही है, वहीं पीठ पर तीर से बना घाव भी पहले से ज्यादा बड़ा दिखाई पड़ रहा है।जिसमें मक्की व कीड़े दिखाई पड़ रहे हैं।वन विभाग निगरानी कर रहा है लेकिन बायसन को उपचार की जरूरत है।निगरानी करने से कोई लाभ होने वाला नहीं है।वन विभाग लगातार उसे कमजोर होते देख रहा है।


10 मीटर भी आगे नहीं बढ़ा बायसन-बायसन पिछले सप्ताह भर से पनिहा नाला के किनारे बैठा हुआ है।एक सप्ताह में वन 10 मीटर भी आगे नहीं बढ़ा है।वह ज्यादा चल नहीं पा रहा है।दाहिने पैर जिसमें चोट लगी थी।उसे वह अब जमीन पर नहीं रख पा रहा है।तीन पैरों की सहायता से पानी पीने नाले तक पहुंचता है तथा वापस किनारे में आकर बैठ जाता है।वन विभाग के कर्मचारियों की टीम लगातार नजर रखे हुए हैं।


लिफ्ट कर ले जाने की जरूरत-बायसन को ज्यादा इलाज की जरूरत है।जिसके लिए उसे कानन पेंडारी या अन्य चिड़ियाघर मे रखकर उपचार करना चाहिए।अभी उसे दर्द का इंजेक्शन लगाकर निगरानी में रखा जाता है।किंतु उसके बढ़ते घाव व चलने में हो रही दिक्कत को देखकर गहन उपचार की आवश्यकता नजर आ रही है।जो जंगल मे संभव नहीं है।

इलाज और सुरक्षा के लिए तय मानकों का उल्लंघ –

छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु वनभैंसा (Wild Water Buffalo) है।इस लुप्तप्राय प्रजाति के बारे में मुख्य तथ्य नीचे दिए गए हैं:वैज्ञानिक नाम: इसका वैज्ञानिक नाम बुबालस अरनी (Bubalus arnee) है।विशेषता: छत्तीसगढ़ में पाए जाने वाले वनभैंसे अपनी शुद्ध नस्ल के लिए जाने जाते हैं, जो इन्हें विशेष महत्व देता है।संरक्षण स्थल: इन्हें मुख्य रूप से उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व (महासमुंद) और इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान (बीजापुर) में संरक्षित किया गया है।स्थिति: यह प्रजाति संकटग्रस्त है और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत सर्वोच्च सुरक्षा प्राप्त है । लेकिन कबीरधाम डीएफओ के संज्ञान में यह मामला होने के बाद भी वन भैंसा को इस तरह से छोड़ा जाना किस तरह की इलाज पद्धति है यह तो वही जान सकते हैं।

वन्य जीयों की मौत के आंकड़े बताते हैं विभाग की गम्भीरता

छत्तीसगढ़ में दिसंबर 2023 में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से अब तक बड़ी संख्या में वन्य जीवों की मौत दर्ज की गई है। विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, यह मौतें मुख्य रूप से हाथियों और बाघों से संबंधित हैं।वन्य जीवों की मौतों के आंकड़े (दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 तक):हाथी: 38 हाथियों की मौत हुई है।बाघ: 9 बाघों की मौत दर्ज की गई है।अन्य वन्य जीव: 562 अन्य जंगली जानवरों (जैसे तेंदुए, भालू, नीलगाय, और चीतल) की मौत हुई है।

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