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मेरा DNA भारतीय है…’ जब पीएम मोदी के सामने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने खोला अपनी जेनेटिक रिपोर्ट का राज, जकार्ता में गूंजी तालियां

जकार्ता/नई दिल्ली, 7 जुलाई 2026

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान जकार्ता में एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक पल देखने को मिला। भारतीय प्रवासियों (भारतीय समुदाय) के एक बड़े कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने मंच से ऐलान किया कि उनकी जेनेटिक रिपोर्ट में ‘भारतीय डीएनए’ (Indian DNA) होने की पुष्टि हुई है। राष्ट्रपति सुबियांतो के इस बयान के बाद पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और पास ही बैठे पीएम नरेंद्र मोदी भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके।

राष्ट्रपति प्रबोवो ने क्या कहा? (पूरा फैक्ट)

​मंच से भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने बेहद हल्के-फुल्के और आत्मीय अंदाज में अपनी इस जेनेटिक रिपोर्ट का खुलासा किया। उन्होंने कहा:

“भारत की अपनी राजकीय यात्रा (जनवरी 2025) से ठीक पहले, मैंने अपना जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्ट (Genome Sequencing Test) करवाया था। जब मेरे डीएनए की जांच हुई, तो पता चला कि मेरे भीतर ‘भारतीय डीएनए’ है।”

​उन्होंने आगे हंसते हुए कहा, “शायद यही वजह है कि जब भी मैं भारतीय संगीत सुनता हूं, मेरा शरीर खुद-ब-खुद थिरकने लगता है। मेरे कई मंत्री और जनरल भी बहुत अच्छा भारतीय गाना गाते हैं और उन्हें डांस करना पसंद है, शायद उन सबके पास भी भारतीय डीएनए है।”

पीएम मोदी ने दिया दिल छूने वाला जवाब

​राष्ट्रपति प्रबोवो के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस एक वाक्य ने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया है। पीएम मोदी ने कहा:

“राष्ट्रपति जी, आपने यह बात तब (2025 में) भी कही थी और आज फिर दोहराई है। आपके इस बयान ने करोड़ों भारतीयों के दिलों को छू लिया है। यह एक ऐसा डीएनए है जो आपसी विश्वास, साझी विरासत और दोनों देशों की सदियों पुरानी यादों से मिलकर बना है।”

संस्कृति और नीतियों की तारीफ, बोले- “मैंने मोदी जी की नीतियां कॉपी कीं”

​राष्ट्रपति प्रबोवो ने भारत और इंडोनेशिया के बीच 2000 साल पुराने सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि इंडोनेशिया की भाषा (बहासा इंडोनेशिया) में लगभग 50 फीसदी शब्द संस्कृत से आए हैं और वहां के लोगों के नाम भी संस्कृत से प्रेरित हैं।

​इसके साथ ही उन्होंने पीएम मोदी के गवर्नेंस मॉडल की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “मैं नरेंद्र मोदी जी का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। राष्ट्रपति बनने से पहले ही मैंने उनकी नीतियों का अध्ययन किया था। चूंकि नीतियों पर कोई कॉपीराइट नहीं होता, इसलिए मैंने भारत की कई नीतियों को इंडोनेशिया में हूबहू कॉपी किया और इसके लिए मोदी जी ने मुझे सहर्ष अनुमति भी दी थी।” उन्होंने यह भी कहा कि इंडोनेशिया, भारत के चुनाव आयोग (ECI) और यहाँ की लोकतांत्रिक व्यवस्था से बहुत कुछ सीख रहा है।

खबर के पीछे का ऐतिहासिक व वैज्ञानिक संदर्भ

  • सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध: इतिहासकार और वैज्ञानिक बताते हैं कि भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया (विशेषकर इंडोनेशिया) के बीच पिछले 2000 से अधिक वर्षों से गहरे व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। चोल साम्राज्य और कलिंग के व्यापारियों, बौद्ध भिक्षुओं और दार्शनिकों के नियमित आवागमन के कारण दोनों क्षेत्रों के लोगों के बीच आनुवंशिक मिश्रण (Population Mixing) हुआ है।
  • वैज्ञानिक आधार: आधुनिक जीनोम सीक्वेंसिंग और डीएनए एंसेस्ट्री टेस्ट (Ancestry Test) किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता तय नहीं करते, बल्कि यह बताते हैं कि इतिहास में हुए प्रवासन (Migration) के कारण उनके पूर्वजों के आनुवंशिक तार किस भौगोलिक क्षेत्र से जुड़े रहे हैं।

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