टीईटी के मुद्दे और आज सुप्रीम कोर्ट में अनुभव बनाम अनिवार्य योग्यता पर हुई बहस कोर्ट के रुख से असमंजसता बरकरार
संक्षेप में: कोर्ट अभी भी "अनिवार्यता बनाम अनुभव" के संतुलन पर विचार कर रहा है,
दिल्ली प्रवक्ता.कॉम 28 अप्रैल 2026
TET (Teacher Eligibility Test) प्रकरण पर आज यानी 28 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई निर्धारित थी। इस मामले में अब तक के मुख्य अपडेट्स इस प्रकार हैं:
सुनवाई और मुख्य बिंदु
सुनवाई का विषय: सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन शामिल हैं) उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जो देशभर में TET की अनिवार्यता को चुनौती देती हैं या उसमें छूट की मांग करती हैं।
2.5 मिलियन शिक्षकों पर असर: यह मामला लगभग 25 लाख शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा है। कोर्ट इस पर विचार कर रहा है कि क्या सेवा में पहले से मौजूद शिक्षकों के लिए भी TET अनिवार्य होना चाहिए और क्या अल्पसंख्यक संस्थानों (Minority Institutions) पर भी यह नियम लागू होता है।
कोर्ट ने मांगे हैं राज्यों से अतिरिक्त स्पष्टीकरण
पिछली टिप्पणियों में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए TET एक आवश्यक मानक है। हालांकि, आज की विस्तृत सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकारों और संबंधित विभागों से कुछ अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगे हैं।
कोर्ट का कड़ा रुख (अनिवार्यता बरकरार)
कोर्ट ने अभी तक अपने पुराने रुख में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। पिछली सुनवाई और आज की चर्चाओं के आधार पर स्थिति यह है:
- 5 साल का नियम: जिन शिक्षकों की रिटायरमेंट में 5 साल से अधिक का समय बचा है, उनके लिए TET पास करना अनिवार्य माना गया है।
- प्रोमोशन के लिए जरूरी: अगर कोई शिक्षक प्रोमोशन (पदोन्नति) चाहता है, तो उसके लिए TET पास करना हर हाल में जरूरी होगा।
- अनुभव बनाम योग्यता: कोर्ट ने फिर दोहराया है कि शिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘अनुभव’ को ‘न्यूनतम योग्यता (TET)’ का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
राहत की उम्मीद और समय सीमा
झारखंड और अन्य राज्यों के मामले में यह बात सामने आई है कि राज्य सरकारों को उन शिक्षकों के लिए विशेष TET परीक्षा आयोजित करने या उन्हें तैयारी के लिए 2 साल का समय देने पर विचार करने को कहा गया है।
हालिया अन्य घटनाक्रम (UPTET और D.El.Ed-ODL)
इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बीच ही, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक बड़ा अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने उन उम्मीदवारों को UPTET 2026 में बैठने की अनुमति दे दी है जिन्होंने NIOS से 18 महीने का D.El.Ed-ODL डिप्लोमा किया है, बशर्ते वे 10 अगस्त 2017 से पहले सेवा में थे।
सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन शिक्षकों की सेवा 5 साल से अधिक बची है, उनके लिए पद पर बने रहने के लिए TET पास करना अनिवार्य होगा।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली कार्यवाही और विस्तृत आदेश का इंतजार है। कोर्ट ने विभिन्न राज्यों और शिक्षक संघों की दलीलों को क्लब (एक साथ) कर दिया है ताकि एक स्पष्ट राष्ट्रीय नीति सामने आ सके।
संक्षेप में: कोर्ट अभी भी “अनिवार्यता बनाम अनुभव” के संतुलन पर विचार कर रहा है, लेकिन संकेत यही हैं कि भविष्य में बिना TET के शिक्षण कार्य जारी रखना मुश्किल होगा।






