Newsभारत का इतिहासराजस्थान

“भारतीय ज्ञान परम्परा : शिक्षण, शोध एवं नवाचार” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

अजमेर में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ और सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय,अजमेर द्वारा आयोजित

Join WhatsApp

7 मई, अजमेर।

“शोधार्थियों के लिए भारतीय ज्ञान परम्परा एक स्वर्णिम अध्याय है, जिसका चिन्तन, मनन और निदिध्यासन परमावश्यक है। एक शोधार्थी के रूप में भारतीय ज्ञान परम्परा के समावेशन की दिशा में अग्रसर होने पर नवाचारों की अभिनव पहल को बल मिलेगा। हमें सही प्रश्न करने होंगे और कॉलोनाइजेशन की मानसिकता को पुरजोर विरोध करना होगा। वास्तविकता में भारतीय ज्ञान परम्परा सत्य को जानने के सशक्त उपादान की सुव्यवस्थित, संयमित एवं सुविकसित प्रणाली है।

अतः हमें स्वयं आत्ममंथन करते हुए अपने अतीत से वर्तमान और वर्तमान से भविष्य की यात्रा पर निकलना होगा।” ये विचार मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ एवं भारतीय ज्ञान परम्परा केन्द्र, सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय, अजमेर के संयुक्त तत्त्वावधान में “भारतीय ज्ञान परम्परा : शिक्षण, शोध एवं नवाचार” विषय पर दिनांक 07 मई 2026 को महात्मा गांधी सभागार, सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय अजमेर में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किए। प्रो. गुप्ता ने कहा कि भारत का दर्शन, वास्तु, भौतिकी, रसायन, गणित आदि विश्व के उन्नत शास्त्र हैं। सत्य को उद्भासित करने के माध्यम से हम अपने हृदय में गहराई से बैठे अविश्वास को दूर सकते हैं।


एबीआरएसएम, उच्च शिक्षा राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. मनोज कुमार बहरवाल ने कार्यशाला के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि शोधार्थियों को शोध प्रारंभ करने से पूर्व भारतीय ज्ञान परम्परा का गहन अध्ययन करना चाहिए। हमें शोध के ज्ञानात्मक और भावात्मक अभिमुखीकरण का सजगता एवं निष्ठापूर्वक विस्तार करना होगा, जो हमारे अनुसन्धान को अतीत के गर्भ से भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाता है।
उद्घाटन समारोह में कार्यशाला समन्वयक एवं कॉलेज शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक प्रो. अनिल दाधीच ने स्वागत उद्बोधन एवं विषय प्रवर्तन करते हुए अतिथि परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस संगोष्ठी के आयोजन का उद्देश्य शोधार्थियों को भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित नवीन विषयों से अवगत करवाना एवं शोध के नए आयाम प्रस्तुत करना है। कार्यशाला हेतु चयनोपरान्त शोधार्थियों के लिए भारतीय ज्ञान परम्परा से जुड़े विविध विषयों में शिक्षण एवं शोध की नवाचार पहल के लिए इस निःशुल्क कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र के पश्चात् सामूहिक परिचर्चा सत्र में प्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं चिंतक हनुमान सिंह राठौड़, खगोलविद् एवं एस्ट्रो फोटोग्राफर एवं सप्तर्षि भारत क्षुद्रग्रह खोज अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक अमृतांशु वाजपेयी तथा इन्फिनिटी फाउंडेशन, अमेरिका के मैनेजिंग ट्रस्टी अनुराग शर्मा वक्ता के रूप में रहे। सत्र का संचालन सहायक निदेशक आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा प्रो. अनिल दाधीच ने किया।
संकायवार सत्र में प्रथम वक्ता के रूप में अनुराग शर्मा मैनेजिंग ट्रस्टी इन्फिनिटी फाउंडेशन, अमेरिका द्वारा शोधार्थियों को भारतीय परिप्रेक्ष्य में एआई की उपादेयता और संतुलित समन्वय के माध्यम से शोध में नवाचारों की संभावनाओं से अवगत करवाया। द्वितीय वक्ता के रूप में अमृतांशु वाजपेयी राष्ट्रीय समन्वयक सप्तर्षि भारत क्षुद्रग्रह खोज अभियान द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा में कालगणना के अमूल्य विज्ञान के माध्यम से शोध में नवाचारों के समावेशन मार्ग प्रशस्त किया।
समारोप सत्र में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में शिक्षाविद् एवं चिन्तक हनुमान सिंह जी राठौड़ ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमें अपनी ज्ञान परम्परा को समझना चाहिए और सही अर्थों में प्रतिष्ठापित करना चाहिए। पश्चिम की परिभाषा से भारतीय ज्ञान को व्याख्यायित करना और संस्कृत शब्दों का अनुवाद अंग्रेजी के अनुसार करना संभव नहीं है। भारतीय ज्ञान के विविध साहित्यिक, कलात्मक एवं पुरातात्विक स्रोत शिक्षा में शाेधपरक नवाचारों के सशक्त एवं जीवन्त उदाहरण हैं। वेद, वेदांग, दर्शन, पुराण, रामायण जैसी अनेक कालजयी कृतियाँ भारतीय चिन्तन में नवाचारों एवं शोध की अपरिमित संभावनाओं का दर्शन कराती हैं। आज के शोध को भारतीय चिन्तन की सुदृढ आधारभूमि एवं वर्तमान तकनीकी कुशलता से ही स्वत्व बोध के दूरदर्शी लक्ष्यों तक पहुँचाया जा सकता है। शोधार्थियों का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य आपके ही कन्धों पर है, आप सक्रिय होकर अनुसन्धानपरक श्रेष्ठताओं के साथ आगे कदम बढ़ाएँ। दो प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिपुष्टि भी दी।
कार्यशाला में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ कॉलेज शिक्षा राजस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रो. सुभाष चंद्र सहित प्रदेशभर से पधारे शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। इस अवसर पर माह जनवरी 16 एवं 17 को आयोजित द्विदिवसीय अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
आयोजन सचिव प्रो. अनूप आत्रेय ने कार्यशाला का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया तथा प्रो. आशुतोष पारीक ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सरिता चांवरिया एवं डॉ. आदित्य शर्मा ने किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button