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प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता गणना को लेकर संघर्ष की रणनीति बनाने शिक्षकों ने की बैठक

के इस निर्णय से शिक्षकों में न्याय एवं पुरानी पेंशन की पात्रता को लेकर नया विश्वास जागृत हुआ है। बैठक में उपस्थित शिक्षकों ने निर्णय लिया कि न्यायालय के आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना तथा पुरानी पेंशन योजना के लाभ हेतु चरणबद्ध रणनीति के साथ व्यापक अभियान चलाया जाएगा

कोरबा प्रवक्ता.कॉम 19 मई 2026
प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना एवं पुरानी पेंशन योजना का लाभ प्रदान किए जाने की मांग को लेकर कोरबा जिले के 1998 एवं 2004 के पूर्व से कार्यरत शिक्षकों की महत्वपूर्ण मंथन बैठक 18 मई 2026 को छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन कार्यालय अंधरी कछार, कोरबा में आयोजित हुई। बैठक में जिले के विभिन्न विकासखंडों—कोरबा, करतला, कटघोरा, पाली एवं पोड़ी उपरोड़ा से बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे

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बैठक को संबोधित करते हुए याचिकाकर्ता एवं कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश बघेल ने कहा कि “पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारियों का संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकार है। संविलियन से पूर्व दी गई सेवाओं को शून्य मानना नैसर्गिक न्याय एवं सेवा निरंतरता के सिद्धांत के विपरीत है।”

उन्होंने बताया कि शिक्षकों की ओर से दायर याचिका क्रमांक WPS No.4021/2020 (ओमप्रकाश बघेल एवं अन्य) तथा WPS No.2452/2023 (सूरजमल पटेल एवं अन्य) पर सुनवाई करते हुए माननीय हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 23 जनवरी 2026 को महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पेंशन एक कल्याणकारी व्यवस्था है तथा संविलियन पूर्व की सेवाओं को शून्य नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने शासन को सेवा की निरंतरता एवं प्रशासनिक नियंत्रण के आधार पर न्यायसंगत नीति निर्मित करने के निर्देश दिए थे।

उक्त निर्णय के विरुद्ध राज्य शासन द्वारा प्रस्तुत अपील WA No.325/2026 को भी माननीय खंडपीठ ने 23 अप्रैल 2026 को निरस्त करते हुए एकलपीठ के आदेश को यथावत रखा। 01/05/2026को मा. न्यायाधीश संजय कुमार अग्रवाल द्वारा याचिका कर्ताओं के पक्ष मे दिये गए पूर्व आदेश एवं राज्य शासन द्वारा की गई अपील के ख़ारिज होने की पुष्टि करते हुए याचिका कर्ताओं के पक्ष मे निर्णय को कायम रखा गया।न्यायालय के इस निर्णय से शिक्षकों में न्याय एवं पुरानी पेंशन की पात्रता को लेकर नया विश्वास जागृत हुआ है।

बैठक में उपस्थित शिक्षकों ने निर्णय लिया कि न्यायालय के आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना तथा पुरानी पेंशन योजना के लाभ हेतु चरणबद्ध रणनीति के साथ व्यापक अभियान चलाया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि वर्षों तक विभागीय नियंत्रण में सेवा देने वाले शिक्षकों की प्रारंभिक सेवाओं को नकारना अन्यायपूर्ण है और शासन को शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।

बैठक में प्राचार्य से लेकर सहायक शिक्षक तक सभी वर्गों के शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही। प्रमुख रूप से ओमप्रकाश बघेल, हरिश्चन्द्र अन्नू, महेंद्र कुमार रात्रे, माधुरी अग्रवाल, सोन सिंह बर्मन, साधराम खरे, संगीता यादव, राजकुमार साहू, जोसन आदित्य, सुनील कुमार, भानु प्रकाश यादव, श्रवण पटेल,छतरम यादव, जाहीर खान, माधुरी पांडेय , दामिनी तिवारी, सावित्री वैष्णव, ज्योति सिंह, मधु दास, रेखा देवांगन, सैलजा सिंह, यशोदा राठौर, ध्रुव कुमार राठौर, अंबिका देवी सोनवानी, चरण सिंह कंवर, रामेश्वरी रत्नाकर, कल्पना त्रिवेदी, पदमा गुप्ता, अमृतलाल रत्नाकर, दिनेश भारद्वाज, शंकरलाल कंवर, गोविंद सिंह प्रजापति, अखिलेश्वरी दास महंत, संतोषी महंत, अनुराधा पांडे, श्रद्धा गौतम, रामलाल सारथी, स्मिता लाल, अनुपमा राजवाड़े, प्रभा सिंह, रामकृपाल साहू सहित बड़ी संख्या में 1998 एवं 2004 पूर्व नियुक्त शिक्षक उपस्थित रहे।

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