छत्तीसगढ़ में ट्रांसफर पर लगी रोक हटाने की मांग नई एवं पारदर्शी नीति जारी होनी चाहिए 2025 में आई थी पॉलिसी
ट्रांसफर पर लगी रोक से जरूरतमंद कर्मचारी परेशान, मुख्यमंत्री समन्वय तक नहीं पहुंच पा रहे आवेदन , छत्तीसगढ़ सरकार ने कर्मचारियों के लिए स्थानांतरण नीति (Transfer Policy) वर्ष 2025 में जारी की थी। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी इस नीति के तहत, राज्य में 6 जून से 25 जून 2025 तक तबादले के लिए आवेदन की प्रक्रिया और समय-सीमा निर्धारित की गई थी। इसके बाद से तबादलों पर फिर से प्रतिबंध लग गया था।
रायपुर प्रवक्ता.कॉम 18 मई 2026
रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण (तबादलों) पर लगी रोक के कारण हजारों कर्मचारी मानसिक और पारिवारिक रूप से परेशान हैं। विशेषकर गंभीर रूप से बीमार, दिव्यांग, पति-पत्नी नीति (पति-पत्नी का अलग-अलग जिलों में होना) और पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे जरूरतमंद कर्मचारी सालों से एक अदद ट्रांसफर के लिए विभागों के चक्कर काट रहे हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, राज्य में फिलहाल सामान्य तबादलों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। नियम के मुताबिक, विशेष या बेहद गंभीर मामलों में मुख्यमंत्री समन्वय (सीएम कोऑर्डिनेशन) से हरी झंडी मिलने के बाद ही स्थानांतरण किया जा सकता है। लेकिन हकीकत यह है कि मैदानी स्तर और विभागीय स्तर पर कड़े नियमों और प्रशासनिक लेटलतीफी के चलते इन जरूरतमंद कर्मचारियों के आवेदन मुख्यमंत्री समन्वय तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं।
फाइलों में दबे आवेदन, समन्वय तक पहुंचने की राह कठिन
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि विभिन्न विभागों के जिला और संभाग स्तरीय कार्यालयों में आवेदन महीनों तक धूल खाते रहते हैं। यदि कोई फाइल मंत्रालय (महानदी भवन) तक पहुंचती भी है, तो उसे मुख्यमंत्री समन्वय समिति के समक्ष भेजने के बजाय ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
कर्मचारी संगठनों के अनुसार
“अनेक कर्मचारी कैंसर, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं या उनके माता-पिता बुजुर्ग और लाचार हैं। स्थानांतरण नीति में ऐसे मामलों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर रोक के कारण फाइलें आगे ही नहीं बढ़ रही हैं। जब आवेदन मुख्यमंत्री तक पहुंचेंगे ही नहीं, तो राहत कैसे मिलेगी?”
’पति-पत्नी नीति’ और ‘गंभीर बीमारी’ वाले सबसे ज्यादा परेशान
सबसे बुरी स्थिति शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के कर्मचारियों की है। दूर-दराज के नक्सल प्रभावित या ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ महिला कर्मचारी, जिनके पति दूसरे जिलों में कार्यरत हैं, वे सालों से पारिवारिक एकीकरण की आस लगाए बैठी हैं। इसके अलावा, कई दिव्यांग कर्मचारी भी अनुकूल पोस्टिंग के लिए विभागों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन ‘तबादलों पर बैन’ का हवाला देकर हर बार उनका आवेदन खारिज या होल्ड कर दिया जाता है।
रोक हटाने या विशेष खिड़की खोलने की मांग
अब राज्य के विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री से इस मामले में सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि:
या तो कुछ समय के लिए स्थानांतरण से रोक हटाई जाए
या फिर गंभीर बीमारियों, दिव्यांगों और पति-पत्नी के मामलों के लिए ‘विशेष खिड़की’ (Special Window) व्यवस्था बनाई जाए, जिससे उनके आवेदन सीधे मुख्यमंत्री समन्वय तक पहुंच सकें और उन्हें मानवीय आधार पर राहत मिल सके।
अब देखना होगा कि प्रशासनिक स्तर पर उलझे इन जरूरतमंद कर्मचारियों की आवाज मुख्यमंत्री तक कब तक पहुंचती है और सरकार इस पर क्या मानवीय निर्णय लेती है।






