आंध्र प्रदेश में जनसंख्या बढ़ाने सरकारी योजना की शुरुवात बच्चा पैदा करने पर मिलेगा 40000
आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में घटती जन्म दर को संभालने और जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए एक नई 'जनसंख्या प्रबंधन नीति' का मसौदा तैयार किया है। इस नीति के तहत, सरकार ने छोटे परिवारों को बढ़ावा देने की पुरानी नीति को बदलकर अब परिवारों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। दूसरा बच्चा डिलीवरी (प्रसव) के समय ₹25,000 की एकमुश्त सहायता। तीसरा बच्चा तुरंत ₹30,000 की नकद सहायता, साथ ही 5 साल तक हर महीने ₹1,000 पोषण भत्ता (पोषण सहायता)। चौथा बच्चा तुरंत ₹40,000 की नकद सहायता और पोषण सहायता।
रायपुर प्रवक्ता.कॉम 17 मई 2026
आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में घटती जन्म दर को संभालने और जनसंख्या संतुलन बनाए रखने के लिए एक नई ‘जनसंख्या प्रबंधन नीति’ का मसौदा तैयार किया है। इस नीति के तहत, सरकार ने छोटे परिवारों को बढ़ावा देने की पुरानी नीति को बदलकर अब परिवारों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में इस योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता और सुविधाओं की घोषणा की है।
योजना के मुख्य बिंदु और मिलने वाले लाभ
सरकार द्वारा घोषित इस योजना के तहत मिलने वाली नकद आर्थिक सहायता और अन्य लाभ निम्नलिखित हैं:
बच्चे का क्रम मिलने वाली वित्तीय सहायता / लाभ
दूसरा बच्चा डिलीवरी (प्रसव) के समय ₹25,000 की एकमुश्त सहायता।
तीसरा बच्चा तुरंत ₹30,000 की नकद सहायता, साथ ही 5 साल तक हर महीने ₹1,000 पोषण भत्ता (पोषण सहायता)।
चौथा बच्चा तुरंत ₹40,000 की नकद सहायता और पोषण सहायता।
अन्य अतिरिक्त सुविधाएं:
निःशुल्क शिक्षा: तीसरे बच्चे को 18 वर्ष की आयु तक सरकारी या आवासीय स्कूलों में मुफ्त शिक्षा दी जाएगी।
माता-पिता के लिए छुट्टी: तीसरे बच्चे के जन्म पर 12 महीने की पैरेंटल लीव (अभिभावक अवकाश) का प्रस्ताव है, जिसमें पिता के लिए 2 महीने की पैटरनिटी लीव (पितृत्व अवकाश) भी शामिल है।
पोषण सहायता: तीसरे और चौथे बच्चे के जन्म पर परिवारों को हर महीने आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से राशन (जैसे बाजरा/मिलिट्स) और अन्य पौष्टिक आहार दिए जाएंगे।
पारंपरिक नसबंदी प्रोत्साहन का अंत:
सरकार ने परिवार नियोजन के तहत नसबंदी के लिए दिए जाने वाले टारगेट और आर्थिक प्रोत्साहनों को रोकने का फैसला किया है।
यह नीति क्यों लाई गई?
आंध्र प्रदेश में कुल प्रजनन दर (TFR) घटकर 1.5 रह गई है, जबकि जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए यह दर कम से कम 2.1 होनी चाहिए। सरकार का मानना है कि अगर यही स्थिति रही, तो भविष्य में युवाओं (काम करने वाले लोगों) की कमी हो जाएगी और बुजुर्गों की आबादी का बोझ बढ़ जाएगा, जिससे आर्थिक विकास प्रभावित होगा।






