पंडरिया के वनांचल में पाए जाने वाले औषधीय पौधा ” कुटज” के संरक्षण पर ध्यान देने की जरूरत
आयुर्वेद में कुटज (Kutaja) को पेट और आंतों के रोगों के लिए सबसे अचूक और शक्तिशाली जड़ी-बूटियों में से एक माना गया है। इसका वैज्ञानिक नाम Holarrhena antidysenterica है, जिसके नाम से ही स्पष्ट है कि यह मुख्य रूप से पेचिश (Dysentery) और दस्त के इलाज में उपयोग की जाती है। कुटज के पेड़ की छाल (Bark), बीज (इंद्रजौ), फूल और पत्तियों का उपयोग कई तरह की आयुर्वेदिक दवाइयां (जैसे कुटजारिष्ट, कुटज घनवटी आदि) बनाने में किया जाता है।
रायपुर / कबीरधाम/ पंडरिया
17 मई 2026
पंडरिया- ब्लाक का वनांचल क्षेत्रों में कुटज की महक बिखरी हुई है।पूरा वन क्षेत्र में कुटज की खुशबू बिखरी हुई है।शाम के समय सड़क पर इसकी भीनी गंध लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है।कुटजा के पौधे क्षेत्र के वनांचल कुजदूर मार्ग पर तथा ग्राम बदौरा के आस-पास सहित क्षेत्र के जंगलों में फैले हुए हैं।कुछ जगह ये छोटी झाड़ियों के रूप में हैं वहीं कुछ जगह बड़े पेड़ बन चुके हैं।इसकी झाड़ियों में सफेद फूल निकले हुए हैं।जो दिखने में भी गुच्छेदार व आकर्षक हैं।वहीं इसकी खुशबू भी लोगों को लुभा रही है।कुटजा एक औषधीय पौधा है,जिसकी ऊंचाई करीब 10 से 15 फिट तक होती है।यह अधिकतर झाड़ियों के रूप में हैं।प्रतिवर्ष इसका रकबा बढ़ते जा रहा है।जो क्षेत्र के लिए लाभकारी है।
औषधीय गुण से भरा है कुटज-कुटज एक औषधीय पौधा है।इसका उपयोग औषधीय के रूप में होता है।आयुर्वेद के क्षेत्र में इसका महत्वपूर्ण योगदान है।वैद्यराज गिरिजा कुमार शुक्ला बताते हैं कि कुटज एक आयुर्वेदिक पौधा है जिससे रिष्ट बनाया जाता है।इसके छाल, पत्ते,बीज व फूल का उपयोग चिकित्सीय क्षेत्र में होता है।डायरिया,त्वचा रोग, पेचिस सहित अनेक रोगों में इसका उपयोग होता है।कुटज बवासीर,पथरी,दांत दर्द,महिलाओं प्रजनन प्रणाली को मजबूत बनाने,पाचन तंत्र को मजबुत करने,कुपोषण दूर करने में सहायक है।क्षेत्र में इसका उपयोग वनवासी लोग करते हैं।
दो वर्ष पहले बड़े पैमाने पर हुई थी कटाई-क्षेत्र के वन ग्राम बदौरा में बड़ी संख्या में कुटज के बड़े पेड़ थे।जिसे दो वर्ष पहले एक व्यापारी द्वारा कटवाकर छाल निकलवाया दिया गया था।जिसके बाद अब फिर से नए – नए पौधे विकसित हो रहे हैं ।वन विभाग को इस महत्वपूर्ण औषधीय पौधों के लिए सजग रहना होगा अन्यथा इनकी पत्तियों को तोड़ने के लिए पौधों की कटाई कर दी जाएगी।

आयुर्वेद में कुटज (Kutaja) को पेट और आंतों के रोगों के लिए सबसे अचूक और शक्तिशाली जड़ी-बूटियों में से एक माना गया है। इसका वैज्ञानिक नाम Holarrhena antidysenterica है, जिसके नाम से ही स्पष्ट है कि यह मुख्य रूप से पेचिश (Dysentery) और दस्त के इलाज में उपयोग की जाती है।
कुटज के पेड़ की छाल (Bark), बीज (इंद्रजौ), फूल और पत्तियों का उपयोग कई तरह की आयुर्वेदिक दवाइयां (जैसे कुटजारिष्ट, कुटज घनवटी आदि) बनाने में किया जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार

प्रमुख आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन (बाजार में उपलब्धता)
आमतौर पर कुटज का सीधा सेवन करने के बजाय आयुर्वेद में इसके बने-बनाए योगों का उपयोग किया जाता है:
कुटजारिष्ट (Kutajarishta): यह एक तरल (Asava-Arishta) दवा है जो पाचन को सुधारने और पुराने दस्त के लिए ली जाती है।
कुटज घनवटी (Kutaj Ghanvati): यह कुटज के अर्क से बनी गोलियां होती हैं, जो पेट दर्द और मरोड़ में तुरंत राहत देती हैं।
कुटजावलेह (Kutajavaleha): यह एक अवलेह (पेस्ट/जैम) के रूप में होता है, जो अल्सरेटिव कोलाइटिस और बवासीर में दिया जाता है।
महत्वपूर्ण सलाह: चूंकि कुटज की प्रकृति रूखी (Rooksha) होती है, इसलिए इसका अत्यधिक या गलत तरीके से सेवन करने पर कब्ज (Constipation) की समस्या हो सकती है। इसे हमेशा किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक (BAMS डॉक्टर) की सलाह और सही खुराक के अनुसार ही लेना चाहिए।






