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सुशासन 2026 की कसौटी पर साय सरकार: ऑन-द-स्पॉट फैसलों से जनता को राहत, लेकिन जटिल मामलों में अब भी इंतजार

सुशासन तिहार 2026: प्रदेशभर में 60% से ज्यादा आवेदनों का मौके पर निपटारा, कुछ जगहों पर अफसरों के रवैये से जनता में नाराजगी

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 05 जून 2026
​छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय सरकार की ओर से शुरू किया गया ‘सुशासन तिहार 2026’ अभियान इस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। 1 मई से शुरू हुआ यह राज्यव्यापी अभियान 10 जून 2026 तक चलना है, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की व्यवस्था को खत्म कर प्रशासन को सीधे जनता के द्वार तक पहुंचाना है।
​इस महाभियान के अंतर्गत अब तक लाखों आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनका जिला और ब्लॉक स्तर पर ऑन-द-स्पॉट (मौके पर ही) निराकरण किया जा रहा है।
​आंकड़ों की जुबानी: अब तक कितने आवेदन और कितना निराकरण?

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छत्तीसगढ़ में चल रहे सुशासन तिहार 2026 के दौरान अब तक पूरे राज्य में लगभग 2लाख 37 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं । इनमें से अधिकतम आवेदनों का समाधान करने और पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही योजनाओं का लाभ दिलाने (जैसे मौके पर ही आयुष्मान और राशन कार्ड) की प्रक्रिया तेजी से जारी है।
​प्रदेशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 पंचायतों के समूह और शहरी क्षेत्रों में वार्डों के क्लस्टर बनाकर विशेष जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। जिलों से आ रहे आंकड़ों के मुताबिक:

निराकरण की स्थिति: कई शिविरों (जैसे रायपुर, बिलासपुर, खैरागढ़ और सरगुजा संभाग) में 80% से 90% तक आवेदनों का मौके पर ही निपटारा किया गया है और शेष लंबित आवेदनों के लिए भी समय-सीमा तय की गई है।
​दुर्ग जिला (एक उदाहरण): अकेले दुर्ग जिले में आयोजित विशेष शिविरों में अब तक कुल 17,210 आवेदन (मांग और शिकायतें) प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 10,541 आवेदनों (लगभग 61%) का त्वरित निराकरण किया जा चुका है।
​रायपुर (मंदिर हसौद शिविर): हाल ही में लगे एक स्थानीय शिविर में 381 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 78 मामलों का तत्काल समाधान निकाला गया।
​सरगुजा (बेलदगी शिविर): लुंड्रा विकासखंड के बेलदगी समाधान शिविर में 1210 आवेदन मिले, जहां मौके पर ही 50 से अधिक हितग्राहियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिया गया।
​मुख्य फोकस:

मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिए हैं कि आयुष्मान भारत, राशन कार्ड, उज्ज्वला योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और राजस्व (जमीन) से जुड़े मामलों का निपटारा अधिकतम एक महीने की समय सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए।
क्या मानती है जनता? ग्राउंड रिपोर्ट और प्रतिक्रियाएं
​’सुशासन तिहार 2026′ को लेकर जनता के बीच से मिली-जुली और बेहद दिलचस्प प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं:
​1. सकारात्मक पक्ष: बरसों पुराना सपना हुआ पूरा
​बड़ी संख्या में ऐसे ग्रामीण और गरीब तबके के लोग हैं, जिनका काम सालों से अटका हुआ था। किसानों को ऑन-द-स्पॉट राजस्व मामलों में राहत मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि:
​राशन कार्ड बनवाने या सुधरवाने के लिए अब शहर के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे।
​बुजुर्गों और दिव्यांगों को पेंशन योजना की स्वीकृति शिविरों में ही मिल रही है।
​युवाओं को खेल किट और महिलाओं को उज्ज्वला योजना का लाभ मौके पर मिलने से लोगों में सरकार के प्रति भरोसा बढ़ा है।
​2. जनता की शिकायतें और कुछ जगहों पर नाराजगी
​अभियान के बड़े दावों के बीच कुछ जगहों पर प्रशासनिक कमियों को लेकर जनता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में नाराजगी भी देखी गई है:
​अधिकारियों का अड़ियल रवैया: कुछ शिविरों (जैसे रायपुर के मंदिर हसौद) में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों (एडीएम) के बीच जनता के काम न होने को लेकर तीखी बहस भी सामने आई है।
​लंबित आवेदन: जनता का एक हिस्सा यह भी मानती है कि आवेदन तो जमा हो रहे हैं, लेकिन जो जटिल मामले (जैसे जमीन विवाद या बड़े विकास कार्य) हैं, वे मौके पर नहीं सुझल रहे और उनके लिए अभी भी इंतजार करना पड़ रहा है।
​सुशासन तिहार का असली उद्देश्य
​कुल मिलाकर, सुशासन तिहार 2026 ने प्रशासनिक मशीनरी में हलचल जरूर पैदा की है। 60% से अधिक आवेदनों का तुरंत निपटारा होना जनता के लिए बड़ी राहत है, लेकिन बचे हुए जटिल आवेदनों का समय पर निराकरण करना साय सरकार के लिए असली कसौटी होगी।

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