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CGRERA का बड़ा फैसला: प्रमोटर को सिंकिंग फंड और कॉमन एरिया आवासीय सोसायटी को सौंपने के सख्त निर्देश

रेरा ने दुर्ग जिले के ग्राम अमलेश्वर में स्थित पंजीकृत आवासीय परियोजना 'हर्षित नियोज सिटी' से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में निवासियों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। प्राधिकरण ने परियोजना के प्रमोटर को सिंकिंग फंड की पूरी राशि और कॉमन एरिया का प्रबंधन तत्काल प्रभाव से सहकारी आवासीय सोसायटी को हस्तांतरित करने का सख्त निर्देश दिया है

रायपुर, 21 जून 2026

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छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CGRERA) ने गृह क्रेताओं (होम बायर्स) के हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। रेरा ने दुर्ग जिले के ग्राम अमलेश्वर में स्थित पंजीकृत आवासीय परियोजना ‘हर्षित नियोज सिटी’ से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में निवासियों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। प्राधिकरण ने परियोजना के प्रमोटर को सिंकिंग फंड की पूरी राशि और कॉमन एरिया का प्रबंधन तत्काल प्रभाव से सहकारी आवासीय सोसायटी को हस्तांतरित करने का सख्त निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद पिछले लंबे समय से चल रहे विवाद पर विराम लग गया है और हर्षित नियोज सिटी के निवासियों व उनकी सहकारी समिति को बड़ी राहत मिली है।

क्या था पूरा मामला और प्रमोटर की मनमानी?

​यह पूरा विवाद तब खुलकर सामने आया जब ‘हर्षित नियोज सिटी रेसिडेन्शियल को-ऑपरेटिव सोसायटी मर्यादित’ ने परियोजना के प्रमोटर सिंघनिया बिल्डॉन प्रा.लि. एवं मेसर्स हर्षित सिंघानिया बिल्डॉन के खिलाफ रेरा में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।

​सोसायटी ने अपनी शिकायत में प्रमोटर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:

​परियोजना की रखरखाव (मैंटेनेंस) व्यवस्था में लगातार देखी जा रही गंभीर कमियां।

साझा सुविधाओं के संचालन और प्रबंधन में प्रमोटर द्वारा की जा रही अनियमितताएं।

फ्लैट और इकाईधारकों से एकत्र की गई सिंकिंग फंड की मोटी राशि को सोसायटी को ट्रांसफर न करना।

साझा क्षेत्रों (कॉमन एरिया) को वैधानिक रूप से सोसायटी के सुपुर्द न किया जाना।

सिंकिंग फंड और कॉमन एरिया पर रेरा का कड़ा रुख

​मामले की दोनों पक्षों से विस्तृत सुनवाई करने के बाद छत्तीसगढ़ रेरा (CGRERA) ने प्रमोटर की जवाबदेही तय करते हुए कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्राधिकरण ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि:

  1. सिंकिंग फंड पर सिर्फ निवासियों का हक: प्रमोटर द्वारा फ्लैट/इकाईधारकों से संकलित की गई सिंकिंग फंड की संपूर्ण राशि को नियमानुसार तुरंत सोसायटी के खाते में ट्रांसफर किया जाए। रेरा ने साफ किया कि यह निधि परिसर के दीर्घकालिक रखरखाव, मरम्मत और संरचनात्मक संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
  2. कानूनन कॉमन एरिया पर सोसायटी का मालिकाना हक: रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 17 का हवाला देते हुए प्राधिकरण ने सभी साझा क्षेत्रों (कॉमन एरिया) और उससे जुड़े अधिकारों को विधिवत सोसायटी के पक्ष में ट्रांसफर करने को कहा है। कानून के मुताबिक, प्रोजेक्ट पूरा होते ही कॉमन एरिया का स्वामित्व आवंटियों के संघ या सोसायटी को सौंपना बिल्डर का वैधानिक दायित्व है।

वास्तविक हितधारकों को मिलेगा नियंत्रण

​CGRERA ने अपने फैसले में कड़ा संदेश देते हुए साफ कर दिया है कि साझा परिसंपत्तियों और संचित निधियों के ट्रांसफर में किसी भी तरह की लापरवाही या देरी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस समयबद्ध हस्तांतरण से अब परियोजना के वास्तविक हितधारकों (वहां रह रहे निवासियों) को अपने परिसर के रखरखाव और संचालन संबंधी फैसलों में पूरा अधिकार और नियंत्रण हासिल होगा।

​रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि रेरा का यह सख्त रुख रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रमोटरों की वैधानिक जवाबदेही सुनिश्चित करने और बाजार में पारदर्शिता व विश्वास लाने की दिशा में एक बड़ी नजीर साबित होगा।

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