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शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य कराने पर हाईकोर्ट सख्त: ‘शिक्षक सिर्फ पढ़ाएं, प्रशासनिक पदों पर न की जाए उनकी पोस्टिंग’

कोर्ट ने कहा कि यह कानून स्पष्ट रूप से अनिवार्य करता है कि शिक्षकों को किसी भी गैर-शैक्षणिक कार्य के लिए तैनात नहीं किया जा सकता, सिवाय कुछ विशेष आकस्मिक परिस्थितियों (जैसे दस वर्षीय जनगणना, आपदा राहत, या स्थानीय अधिकारियों/विधानसभा/संसद के चुनाव) के।

बिलासपुर प्रवक्ता.कॉम

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23 जून 2026

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि शिक्षण संवर्ग (टीचिंग कैडर) के शिक्षकों या व्याख्याताओं को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) जैसे प्रशासनिक पदों पर पदस्थ नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उच्च अधिकारियों को शिक्षण संवर्ग के सरकारी कर्मचारियों को प्रशासनिक संवर्ग के पदों पर तैनात करने से बचना चाहिए। कोर्ट ने साफ किया कि शिक्षकों का मूल काम बच्चों को पढ़ाना है।

​यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता रवि कुमार गौतम द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए 23 जून 2026 को पारित किया।

क्या था पूरा मामला?

​याचिकाकर्ता रवि कुमार गौतम वर्ष 2015 में सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के पद पर नियुक्त हुए थे, जो कि एक प्रशासनिक संवर्ग का पद है। वह जिला जांजगीर-चांपा के बालोदा ब्लॉक में प्रभारी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

​लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 10 जून 2026 को एक आदेश जारी कर पीएम श्री स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल, बालोदा के व्याख्याता श्री अनिल कुमार शर्मा को बालोदा के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) का प्रभार सौंप दिया गया था। इस आदेश के कारण याचिकाकर्ता को हटा दिया गया था, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां और निर्णय:

कैडर की भिन्नता : हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता प्रशासनिक संवर्ग का हिस्सा हैं, जबकि जिन्हें प्रभार दिया गया है (प्रतिवादी नंबर 4), वे मूल रूप से शिक्षण संवर्ग (Teaching Cadre) के व्याख्याता हैं। विभाग को प्रशासनिक और शैक्षणिक संवर्ग के बीच के अंतर को समझना होगा।

RTE एक्ट की धारा 27 का उल्लंघन: न्यायालय ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 की धारा 27 का विशेष रूप से उल्लेख किया

कोर्ट ने कहा कि यह कानून स्पष्ट रूप से अनिवार्य करता है कि शिक्षकों को किसी भी गैर-शैक्षणिक कार्य के लिए तैनात नहीं किया जा सकता, सिवाय कुछ विशेष आकस्मिक परिस्थितियों (जैसे दस वर्षीय जनगणना, आपदा राहत, या स्थानीय अधिकारियों/विधानसभा/संसद के चुनाव) के।

  1. भर्ती नियमों के विपरीत: कोर्ट ने ‘छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती और पदोन्नति नियम, 2026’ का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का पद प्रशासनिक संवर्ग के अंतर्गत आता है। शिक्षण संवर्ग के किसी सदस्य को सीधे इस प्रशासनिक पदानुक्रम में प्रभार सौंपना नियमों की विधायी मंशा के पूरी तरह विपरीत और मनमाना है।
  2. विवादित आदेश निरस्त (Quashed): हाईकोर्ट ने माना कि प्रतिवादी को BEO का प्रभार सौंपने का सरकार का आदेश कानूनन सही नहीं है। अदालत ने 10 जून 2026 के विवादित आदेश को अवैध पाते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया और याचिकाकर्ता की रिट याचिका को स्वीकार कर लिया।

निर्णय का औचित्य

हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब शिक्षा विभाग में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इस आदेश से यह साफ हो गया है कि भविष्य में प्रशासनिक संवर्ग के पदों पर केवल उसी विभाग या कैडर के पात्र अधिकारियों की ही नियुक्ति होगी, जिससे शिक्षकों को प्रशासनिक उलझनों से दूर रखकर पूरी तरह शिक्षण कार्य में लगाया जा सके।

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