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शिक्षकों पर प्रशासनिक व तकनीकी कार्यों का बढ़ता बोझ: यूडाइस प्लस और प्रशस्त ऐप की अनिवार्यता पर उठे सवाल

समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ का कड़ा निर्देश: 25 अगस्त तक UDISE+ में CWSN और शिक्षकों की 100% प्रविष्टि अनिवार्य, PRASHAST App 2.0 पर होगी स्क्रीनिंग"

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 11 अगस्त 2026

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राज्य में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के नाम पर मैदानी स्तर पर कार्यरत शिक्षकों पर प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा रायपुर द्वारा हाल ही में जारी किए गए आदेश इसका ताजा उदाहरण हैं, जिसमें शिक्षकों के कंधों पर शिक्षण कार्य के साथ-साथ पोर्टल और ऐप आधारित कार्यों की भारी जिम्मेदारी डाल दी गई है।

अध्यापन छोड़ पोर्टल प्रविष्टि में उलझे शिक्षक

नवीन निर्देशों के मुताबिक, शिक्षकों को न केवल अपने स्कूलों के दिव्यांग बच्चों (CWSN) की शत-प्रतिशत जानकारी यूडाइस प्लस (UDISE+) पोर्टल पर दर्ज करनी होगी, बल्कि खुद प्रधानाचार्य, व्याख्याता और समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी अपनी पूरी प्रविष्टि इस पोर्टल पर अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करनी होगी। एक तरफ जहां स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन शिक्षकों की मुख्य जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें लगातार विभिन्न ऐप्स और पोर्टलों पर डेटा फीड करने के दबाव से जूझना पड़ रहा है।

समय-सीमा और कार्रवाई की तलवार

विभाग द्वारा इस तकनीकी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए बेहद कम समय-सीमा निर्धारित की गई है:

शिक्षकों को अनिवार्य रूप से 13 अगस्त 2026 तक ‘प्रशस्त ऐप 2.0’ (PRASHAST App 2.0) से जुड़े प्रशिक्षण वीडियो देखने के निर्देश दिए गए हैं।

  • ​यूडाइस प्लस पर शत-प्रतिशत डेटा प्रविष्टि की अंतिम तिथि 25 अगस्त 2026 तय की गई है।
  • ​आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय तक डेटा दर्ज नहीं होता है, तो संबंधित शिक्षकों और शाला प्रमुखों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।

शिक्षक संगठनों की चिंता

शिक्षाविदों और शिक्षकों का मानना है कि इस तरह के तकनीकी कार्यों और कड़े प्रशासनिक आदेशों के चलते शिक्षकों का मुख्य ध्यान बच्चों को पढ़ाने से हटकर तकनीकी खानापूर्ति और डेटा प्रबंधन पर केंद्रित हो जाता है। बार-बार की समयावधि और पोर्टल की तकनीकी पेचीदगियों के बीच स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों पर मानसिक दबाव लगातार गहराता जा रहा है।

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