RTE एक्ट में संशोधन की मांग: पूर्व-नियुक्त शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए महासंघ ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के सामने रखीं 5 बड़ी मांगें
TET की अनिवार्यता से स्थायी मुक्ति की मांग: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संकट में आए लाखों शिक्षकों के समर्थन में उतरा महासंघ
नई दिल्ली प्रवक्ता कॉम
24 जून 2026
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त लाखों शिक्षकों के लिए विधायी और नीतिगत संरक्षण सुनिश्चित करने की मांग की है। महासंघ का यह कदम माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णय के बाद उत्पन्न हुई परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में सामने आया है।

असुरक्षा और अनिश्चितता का माहौल
महासंघ के पत्र के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा 23 अगस्त 2010 को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) संबंधी अधिसूचना जारी की गई थी। परंतु सर्वोच्च न्यायालय के नवीनतम आदेशों के बाद, देश भर के विभिन्न राज्यों में वर्ष 2010 से पहले से पूरी तरह से वैध और नियमों के अनुरूप नियुक्त शिक्षकों की सेवा-अधिकार, वरिष्ठता, पदोन्नति, वेतन और पेंशन को लेकर गंभीर अनिश्चितता और असुरक्षा का माहौल बन गया है। इससे शिक्षकों के साथ-साथ उनके परिवारों में भी भारी चिंता व्याप्त है।



प्राकृतिक न्याय और विधिक सिद्धांतों का हवाला
महासंघ की महासचिव प्रो. गीता भट्ट और अन्य पदाधिकारियों ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि इन शिक्षकों की नियुक्तियां तत्कालीन प्रभावी नियमों, योग्यताओं और चयन प्रक्रियाओं के अनुरूप पूर्णतः वैधानिक रूप से संपन्न हुई थीं। दशकों से देश की शिक्षा व्यवस्था (विशेषकर दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों) को सुदृढ़ बनाने वाले इन शिक्षकों पर बाद में निर्धारित पात्रता मानकों (TET) को प्रतिगामी प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू करना ‘कानूनी निश्चितता’ (Legal Certainty), ‘वैध अपेक्षा’ (Legitimate Expectation) और ‘प्राकृतिक न्याय’ (Natural Justice) के सिद्धांतों के सर्वथा विपरीत है।
महासंघ द्वारा केंद्र सरकार से की गई प्रमुख मांगें:
- TET से स्थायी मुक्ति: 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त करने के लिए स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं।
- सेवा एवं वरिष्ठता का संरक्षण: इन शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति, वेतन, पेंशन एवं अन्य सभी वैधानिक अधिकारों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए औपचारिक नीतिगत व विधायी संरक्षण दिया जाए।
- RTE अधिनियम, 2009 में संशोधन: शिक्षा का अधिकार अधिनियम या अन्य उपयुक्त कानून में आवश्यक संशोधन कर एक स्पष्ट प्रावधान जोड़ा जाए, जिससे पूर्व-नियुक्त शिक्षकों को पूर्ण विधिक सुरक्षा मिल सके।
- भविष्य की नियुक्तियों पर ही लागू हो नियम: संसद द्वारा विधायी संशोधन के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाए कि TET की अनिवार्यता केवल भविष्य की नियुक्तियों पर लागू होगी, न कि दशकों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर।
- राज्यों को तत्काल दिशा-निर्देश: सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को तत्काल प्रभाव से दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस और असुरक्षा की भावना को समाप्त किया जाए।
महासंघ ने अंत में विश्वास व्यक्त किया है कि राष्ट्र निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान देने वाले इस शिक्षक वर्ग के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार संवेदनशीलता, दूरदर्शिता और न्यायपूर्ण नीति का परिचय देते हुए तत्काल विधायी हस्तक्षेप करेगी।






