TET अनिवार्यता मुद्दा: राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का देशव्यापी अभियान, सांसदों को सौंपा ज्ञापन संसद के मानसून सत्र में टीईटी अनिवार्यता के प्रावधानों में संशोधन के लिए समर्थन मांगा है
अखिल भारतीय शैक्षिक महासभा के राष्ट्रीय नेतृत्व का कहना है कि यह लड़ाई केवल ज्ञापनों तक सीमित नहीं रहेगी। अगर मानसून सत्र में इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो संगठन देश भर के शिक्षकों को एकजुट कर आंदोलन को और तेज करेगा। फिलहाल, सांसदों की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन से महासभा को उम्मीद है कि इस सत्र में टीईटी के नियमों में संशोधन का रास्ता साफ हो सकता है।
नई दिल्ली (प्रवक्ता डॉट कॉम):
5 जुलाई 2026
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के नियमों में बदलाव को लेकर अखिल भारतीय शैक्षिक महासभा (ABSM) ने अब सीधे संसद का दरवाजा खटखटाया है। आगामी मानसून सत्र को देखते हुए महासभा ने देशव्यापी स्तर पर अपनी लामबंदी तेज कर दी है। महासभा के पदाधिकारियों ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई सांसदों से मुलाकात कर टीईटी अनिवार्यता के प्रावधानों में संशोधन के लिए समर्थन मांगा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात और आश्वासन

अखिल भारतीय शैक्षिक महासभा के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की। महासभा के पदाधिकारियों ने रक्षा मंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें टीईटी परीक्षा से जुड़े वर्तमान नियमों के कारण शिक्षकों और अभ्यर्थियों को आ रही व्यावहारिक दिक्कतों से अवगत कराया गया।
महासभा के दावों के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनकी मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और इस विषय पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए संबंधित मंत्रालय से चर्चा करने का आश्वासन दिया है।
दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश के सांसदों का खटखटाया दरवाजा
मानसून सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए महासभा की अलग-अलग कमेटियों ने विभिन्न राज्यों के सांसदों से संपर्क साधा है:
दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी के सांसदों से मिलकर महासभा ने इस बात पर जोर दिया कि नियमों में लचीलापन लाना वक्त की जरूरत है।
राजस्थान व मध्य प्रदेश: इन राज्यों के भाजपा और विपक्षी दलों के सांसदों को भी ज्ञापन सौंपे गए हैं। सांसदों ने भरोसा दिलाया है कि वे इस संवेदनशील और रोजगार से जुड़े मुद्दे को संसद के पटल पर उठाने का प्रयास करेंगे।
क्या हैं महासभा की मुख्य मांगें?
महासभा का मानना है कि टीईटी की वर्तमान अनिवार्यता के कुछ प्रावधान व्यावहारिक रूप से कई अनुभवी और योग्य शिक्षकों के लिए बाधा बन रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
अनुभवी शिक्षकों को छूट: जो शिक्षक सालों से शिक्षण कार्य में लगे हैं, उन्हें टीईटी की अनिवार्यता से कुछ राहत दी जाए।
प्रावधानों में संशोधन: नियमों को और अधिक व्यावहारिक और राज्य स्तर की परिस्थितियों के अनुकूल बनाया जाए।
संसद में गूंजे आवाज:
आगामी मानसून सत्र में कानून के इस हिस्से में जरूरी संशोधन के लिए निजी विधेयक या चर्चा के माध्यम से कदम उठाया जाए।
आगे की रणनीति
अखिल भारतीय शैक्षिक महासभा के राष्ट्रीय नेतृत्व का कहना है कि यह लड़ाई केवल ज्ञापनों तक सीमित नहीं रहेगी। अगर मानसून सत्र में इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो संगठन देश भर के शिक्षकों को एकजुट कर आंदोलन को और तेज करेगा। फिलहाल, सांसदों की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन से महासभा को उम्मीद है कि इस सत्र में टीईटी के नियमों में संशोधन का रास्ता साफ हो सकता है।
धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मिले ):

24 जून 2026 को महासंघ के एक विशेष केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने सीधे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस मुलाकात में मांग की गई कि वर्ष 2011 से पहले या टीईटी लागू होने से पूर्व से सेवा दे रहे नियमित शिक्षकों को इस बाध्यता से पूरी तरह मुक्त रखा जाए।
कोटा-बूंदी में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से मिले सौंपा ज्ञापन:

महासंघ के पदाधिकारियों (जिसमें राजस्थान प्रांतीय इकाई के पदाधिकारी भी शामिल थे) ने कोटा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से मुलाकात की और प्रधानमंत्री व केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन उन्हें सौंपा।
विधायी कदम उठाने की मांग: प्रतिनिधिमंडल ने स्पीकर महोदय को बताया कि 2010-11 (टीईटी लागू होने) से पहले से कार्यरत अनुभवी शिक्षकों पर इस नियम को पूर्व प्रभाव से थोपना न्यायसंगत नहीं है। महासंघ ने मांग की कि आगामी संसद सत्र में इस नीतिगत विसंगति को दूर करने के लिए विशेष चर्चा कराई जाए और आवश्यक विधायी कदम (कानूनी संशोधन) उठाए जाएं।
सकारात्मक रुख: लोकसभा अध्यक्ष ने महासंघ की बात को बेहद गंभीरता से सुना और इस संवेदनशील विषय पर उचित प्रक्रिया के तहत ध्यान देने का आश्वासन दिया।
उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश
अरुण सागर (सांसद, शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश): राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की स्थानीय इकाई (जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा के नेतृत्व में) ने लोकसभा सदस्य अरुण सागर से भेंट कर उन्हें केंद्र सरकार के स्तर पर स्पष्ट नीति जारी करवाने के लिए ज्ञापन सौंपा।
मनोज कुमार / मनोज राम भारती (सांसद, सासाराम, बिहार): प्राथमिक शिक्षक संघ के शिष्टमंडल (प्रधान सचिव अखिलेश्वर कुमार सिंह के नेतृत्व में) ने सासाराम के सांसद से सर्किट हाउस में मुलाकात की। सांसद ने शिक्षकों को आश्वस्त किया है कि वे आगामी मानसून सत्र में 30 लाख से अधिक शिक्षकों को प्रभावित करने वाले इस गंभीर मुद्दे को संसद के पटल पर उठाएंगे।
दिल्ली में सांसद बांसुरी स्वराज ,स्वाति मालीवाल से भी मिले
यह महत्वपूर्ण मुलाकात अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, दिल्ली प्रदेश के महामंत्री डॉ. अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में हुई। प्रतिनिधिमंडल ने सांसद स्वाति मालीवाल को अवगत कराया कि टीईटी लागू होने (वर्ष 2010-11) से पहले से जो शिक्षक नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन पर इस नियम को थोपना व्यावहारिक रूप से गलत है।

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज से मुलाकात कर 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी (TET) अनिवार्यता से स्थायी राहत देने की मांग की है।

अतिरिक्त महामंत्री बृजराज पारीक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने माननीय सांसद को सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के हालिया निर्णय से उत्पन्न हुई परिस्थितियों और उससे प्रभावित हो रहे हजारों शिक्षकों की अनिश्चित स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है और यह 13 अगस्त 2026 तक चलेगा।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने हाल ही में इसकी आधिकारिक घोषणा की है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरकार की सिफारिश पर दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के इस सत्र को बुलाने की मंजूरी दे दी है।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) इसीलिए 5 जुलाई तक अपना राष्ट्रव्यापी अभियान खत्म कर रहा है, ताकि 20 जुलाई से शुरू हो रहे इसी सत्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) छूट के मुद्दे को सांसदों के जरिए मजबूती से उठवाया जा सके।






