डीपीआई के नए आदेश से शिक्षक आक्रोषित: वीएसके ऐप से उपस्थिति और वेतन भुगतान के निर्देश पर उठे कई सवाल बोले ये शिक्षकों का मानसिक उत्पीड़न
विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस आदेश को मैदानी वास्तविकताओं को दरकिनार कर थोपा गया तुगलकी फरमान करार दिया है। संगठनों का कहना है कि तकनीकी व्यवस्थाओं को पूरी तरह दुरुस्त किए बिना इस तरह की सख्त कार्रवाई करना शिक्षकों का मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न है।

रायपुर: प्रवक्ता.कॉम 28 जुलाई ,2026
लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई), छत्तीसगढ़ द्वारा वीएसके (VSK) ऐप और आधार आधारित बायोमैट्रिक उपस्थिति के आधार पर शिक्षकों एवं कर्मचारियों के जुलाई माह के वेतन भुगतान को लेकर एक नया आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के प्रशासनिक हलकों और शिक्षक संगठनों के बीच भारी सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
आदेश का मुख्य विवरण

डीपीआई द्वारा जारी पत्र (क्रमांक/एम.आई.एस./एन-123/, दिनांक 27.07.2026) के माध्यम से आयुक्त समग्र शिक्षा, रायपुर को निर्देशित किया गया है कि वे आगामी 01.08.2026 की स्थिति में वीएसके ऐप में अपंजीकृत शिक्षकों व कर्मचारियों की सूची उपलब्ध कराएं। साथ ही, जुलाई माह के कुल कार्य दिवसों में शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की उपस्थिति व अनुपस्थिति की जानकारी डीडीओ (DDO) वार मांगी गई है। इस पत्र में पूर्व में जारी 12 जून 2026 के पत्र और 14 जुलाई 2026 के उस आदेश का संदर्भ दिया गया है जिसमें ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज न होने पर जुलाई माह का वेतन रोकने की बात कही गई थी।
आदेश पर खड़े हो रहे ये गंभीर सवाल
वायरल आदेश और प्रमाणिकता का संशय:

शुरुआत में बिना स्पष्ट पृष्ठांकन और प्रतिलिपि के सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले आदेशों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। हालांकि, बाद के पत्रों में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और एनआईसी (NIC) के अधिकारियों को प्रतिलिपि दी गई है, लेकिन पूर्व में बिना मुद्रित कड़ियों के आदेशों के वायरल होने से इसकी प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
बार-बार आदेश जारी होने की आवश्यकता क्यों? शिक्षकों और कर्मचारियों का तर्क है कि यदि पूर्व में जारी आदेश और निर्देश पहले से ही प्रभावी थे, तो लगातार कम अंतराल पर इसी विषय पर दोबारा आदेश निकालने की क्या आवश्यकता आन पड़ी?
तकनीकी और नेटवर्क समस्याओं का जिम्मेदार कौन?
प्रदेश के कई दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में आज भी इंटरनेट कनेक्टिविटी, सर्वर डाउन और तकनीकी खामियां एक बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में यदि कोई शिक्षक तकनीक या नेटवर्क की समस्या के कारण समय पर ऑनलाइन हाजिरी दर्ज नहीं कर पाता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर उनका वेतन रोकना कितना न्यायसंगत है?
शिक्षक संगठनों में आक्रोश और मनमानी का आरोप: विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस आदेश को मैदानी वास्तविकताओं को दरकिनार कर थोपा गया तुगलकी फरमान करार दिया है। सोशल मीडिया में इस आदेश के संबंध में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है ,शिक्षक चंद्रप्रकाश, मोहन सिंह, राम शरण , उमेश सिंह , नरेंद्र ठाकुर का कहना है कि तकनीकी व्यवस्थाओं को पूरी तरह दुरुस्त किए बिना इस तरह की सख्त कार्रवाई करना शिक्षकों का मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न है।





