सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: कर्मचारी की गलती के बिना ACR उपलब्ध न होने पर नहीं रोका जा सकता प्रमोशन
नियोक्ता अपनी ही प्रशासनिक खामियों का फायदा उठाकर कर्मचारियों को सेवा लाभ से वंचित नहीं कर सकता। राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था देते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर हो प्रमोशन का आकलन।

नई दिल्ली/जयपुर:
8 अगस्त 2026
देश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ी राहत भरा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट उसकी अपनी किसी गलती के बिना उपलब्ध नहीं है, तो इस आधार पर उसे पदोन्नति या अन्य सेवा संबंधी लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।
यह अहम फैसला जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़ी एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा कानूनी विवाद राजस्थान राज्य से जुड़ा है, जहाँ एक न्यायिक अधिकारी (एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज अभय जैन) को गलत तरीके से नौकरी से बाहर रखे जाने और उस समयावधि की ACR उपलब्ध न होने के कारण ‘सिलेक्शन स्केल’ और ‘सुपर टाइम स्केल’ जैसे प्रमोशनीय लाभ देने से इनकार कर दिया गया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई।
कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां:
नियोक्ता अपनी गलती का लाभ नहीं ले सकता: सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि यदि जरूरी ACR उपलब्ध न होने के लिए विभाग या नियोक्ता खुद जिम्मेदार है, तो इसका खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगतना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि “कानून किसी भी पक्ष को अपने ही गलत काम या प्रशासनिक विफलता से फायदा उठाने की अनुमति नहीं देता है।”
बाकी रिकॉर्ड के आधार पर हो मूल्यांकन:
अदालत ने निर्देश दिया कि यदि किसी समयावधि की ACR फाइल में मौजूद नहीं है, तो कर्मचारी के हक और पदोन्नति का आकलन बाकी बची हुई CR के आधार पर किया जाना चाहिए।
देशभर के लिए निर्देश:
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट आदेश जारी करते हुए देश के सभी उच्च न्यायालयों की रजिस्ट्रियों को इस फैसले की कॉपी भेजने का निर्देश दिया है, ताकि सर्विस मैटर्स में इस सिद्धांत का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
कर्मचारियों के लिए क्या बदलेगा?
अक्सर देखने में आता है कि प्रशासनिक अमले की लेट-लतीफी, फाइलें गुम होने या समय पर रिपोर्ट तैयार न होने के कारण कर्मचारियों की ACR समय पर अपडेट नहीं हो पाती हैं। इसके चलते विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकों में ऐसे कर्मचारियों के प्रमोशन अटक जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्ट निर्णय के बाद अब विभाग केवल ‘ACR न होने’ का बहाना बनाकर किसी भी योग्य कर्मी का प्रमोशन नहीं रोक सकेंगे।





