टीईटी अनिवार्यता सरकार नहीं सुप्रीम कोर्ट का निर्णय”: छत्तीसगढ़ में गरमाया शिक्षकों का मुद्दा केंद्रीय स्तर पर आंदोलन हो तभी परिणाम

रायपुर प्रवक्ता. कॉम 13 अगस्त 2026
(विजय सिंह ठाकुर)
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के बीच स्थिति आमने-सामने की बन गई है। एक ओर जहां टीईटी पास कर चुके शिक्षक इसके समर्थन में खुलकर मैदान में आ गए हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों का एक नया मोर्चा भी इसके समर्थन में सामने आया है। इस बीच, शिक्षकों ने संघर्ष समिति के गठन का स्वागत तो किया है, लेकिन इसे नाकाफी बताते हुए कहा है कि इस तरह के सीमित प्रयासों से कोई ठोस परिणाम हासिल नहीं होगा।
टीईटी अनिवार्यता कोर्ट का निर्णय, केंद्र स्तर पर हो पहल:
चर्चा के दौरान यह बात सामने आई है कि देश भर के शिक्षकों को यह अच्छी तरह पता है कि टीईटी की अनिवार्यता सरकार का नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट का एक महत्वपूर्ण निर्णय है। ऐसे में केवल राज्य स्तर पर नहीं, बल्कि केंद्र सरकार ही इस संबंध में कोई पहल कर सकती है। जानकारों और शिक्षकों का मानना है कि यदि संघर्ष समिति को सफलता हासिल करनी है, तो उसे छत्तीसगढ़ के दायरे से बाहर निकलकर केंद्रीय स्तर पर अपनी आंदोलन की नीति तैयार करनी चाहिए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और सुप्रीम कोर्ट का प्रावधान:
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरा मामला राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों और संशोधनों से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर टीईटी को अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता के रूप में स्वीकार किया है। चूंकि यह एक केंद्रीय प्रावधान है, इसलिए तमाम शिक्षक संगठनों को आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आना चाहिए था।
शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग यह मान रहा है कि यदि सभी संगठन एकजुट होकर केंद्र सरकार के समक्ष अपनी बात रखते, तो स्थिति ज्यादा सकारात्मक हो सकती थी। फिलहाल, छत्तीसगढ़ में टीईटी पास और गैर-टीईटी पास शिक्षकों के आमने-सामने आने से यह मुद्दा और अधिक गरमाता जा रहा है।




