छत्तीसगढ़: पंचायत शिक्षकों के क्रमोन्नति वेतनमान की लंबी कानूनी लड़ाई में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट ने मामला हाईकोर्ट भेजा जानिए सुप्रीम कोर्ट ने फिर हाईकोर्ट को प्रकरण की सुनवाई का आदेश क्यों दिया ?
पूरा कानूनी विवाद वर्ष 1998 और 2005 के दौरान पंचायत संवर्ग और नगरीय निकायों में नियुक्त शिक्षकों (तत्कालीन शिक्षाकर्मियों) की क्रमोन्नति वेतनमान और सेवा लाभों की पात्रता से जुड़ा हुआ है। शिक्षकों का पक्ष रहा है कि लंबी सेवा अवधि पूरी होने के बावजूद उन्हें राज्य शासन के तय दिशा-निर्देशों और परिपत्रों के अनुरूप समयबद्ध क्रमोन्नत वेतनमान का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इ
बिलासपुर/नई दिल्ली:
प्रवक्ता.कॉम 19 अगस्त 2026
छत्तीसगढ़ के हजारों पंचायत संवर्ग और नगरीय निकायों के शिक्षकों के लिए क्रमोन्नति वेतनमान (टाइम-बाउंड पे स्केल) से जुड़े बहुचर्चित कानूनी विवाद में सर्वोच्च न्यायालय ने एक बड़ा और अहम निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी सात अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए प्रकरण को नए सिरे से विचार के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (बिलासपुर) को वापस (रिमांड) भेज दिया है। इस आदेश के बाद एक बार फिर न्याय की आस लगाए बैठे शिक्षकों और उनके संगठनों की निगाहें हाईकोर्ट के आगामी रुख पर टिक गई हैं।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा कानूनी विवाद वर्ष 1998 और 2005 के दौरान पंचायत संवर्ग और नगरीय निकायों में नियुक्त शिक्षकों (तत्कालीन शिक्षाकर्मियों) की क्रमोन्नति वेतनमान और सेवा लाभों की पात्रता से जुड़ा हुआ है। शिक्षकों का पक्ष रहा है कि लंबी सेवा अवधि पूरी होने के बावजूद उन्हें राज्य शासन के तय दिशा-निर्देशों और परिपत्रों के अनुरूप समयबद्ध क्रमोन्नत वेतनमान का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके विपरीत, पूर्व में हुई सुनवाइयों के दौरान और प्रशासनिक स्तर पर यह तर्क दिया जाता रहा है कि पंचायत नियमों के तहत नियुक्त कार्मिकों और स्कूल शिक्षा विभाग के नियमित शिक्षकों के सेवा नियम अलग-अलग हैं, जिसके चलते यह पेंच लंबा खींचता चला गया।
किसने लगाई थी याचिकाएं?
इस लंबी कानूनी लड़ाई के तहत विभिन्न जिलों के प्रभावित शिक्षकों और उनके कर्मचारी संगठनों द्वारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक का दरवाजा खटखटाया गया। क्रमोन्नति वेतनमान, सही ग्रेड पे निर्धारण और एरियर के भुगतान की मांग को लेकर शीर्ष अदालत में कुल सात विशेष याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिन पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण न्यायिक कदम उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने केस हाईकोर्ट को क्यों किया रेफर?
सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष जब इन सभी याचिकाओं पर पक्षों की दलीलें रखी गईं, तो मामले के कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं की गहराई से समीक्षा की गई। शीर्ष अदालत ने पाया कि इस प्रकरण के कई ऐसे विधिक पहलू और दस्तावेज हैं, जिन पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के स्तर पर नए सिरे से और समग्रता से विचार किए जाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य के साथ सुप्रीम कोर्ट ने मामले को ओपन आस्पेक्ट के साथ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को रिमांड कर दिया है, ताकि सभी पक्षों को अपनी बात और कानूनी दस्तावेज मजबूती से रखने का पूरा अवसर मिल सके।
शिक्षकों में जगी उम्मीद
इस आदेश के बाद शिक्षक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के इस रुख का स्वागत किया है। संगठनों का मानना है कि हाईकोर्ट में नए सिरे से होने वाली सुनवाई के दौरान वे अपने सभी वैधानिक दस्तावेजों और तर्कों को पूरी मजबूती के साथ रखेंगे। बहरहाल, हजारों शिक्षकों का भविष्य अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की अगली सुनवाइयों और आने वाले निर्णयों पर टिकी हुई है।





