Breaking Newsकर्मचारी आंदोलनकाम की खबरछत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों का महाआंदोलन: बरसात भी नहीं रोक पाई शिक्षकों का गुस्सा, सरकार के ‘तुगलकी फरमान’ के खिलाफ बस्तर से सरगुजा तक गूंजा आक्रोश

TET अनिवार्यता और सेवा सुरक्षा को लेकर सड़क पर उतरे 82 हजार शिक्षक, शिक्षक साझा मंच के आह्वान पर ब्लॉक स्तर पर जोरदार प्रदर्शन

रायपुर /बिलासपुर/ राजनादगांव/ धमतरी/ जांजगीर

Join WhatsApp

पप्रवक्ता.कॉम 22 अगस्त 2026

छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों के भविष्य, सेवा सुरक्षा और न्यायपूर्ण अधिकारों को लेकर शिक्षक साझा मंच द्वारा शुरू किया गया चरणबद्ध आंदोलन अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रदेश के 82 हजार सेवारत शिक्षकों की आवाज बुलंद करते हुए तीन प्रमुख संगठनों—छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, नवीन शिक्षक संघ एवं सर्व शिक्षक संघ—के संयुक्त आह्वान पर आज प्रदेश के सभी विकासखंडों (ब्लॉकों) में जोरदार प्रदर्शन किया गया। बारिश और तमाम प्रशासनिक अवरोधों के बावजूद हज़ारों शिक्षक सड़कों पर उतरे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

​आंदोलन के प्रमुख बिंदु और विस्तृत विश्लेषण

मंच का स्पष्ट कहना है कि वर्षों से निष्ठापूर्वक शिक्षा व्यवस्था को अपनी सेवाएं दे रहे सेवारत शिक्षकों के भविष्य को केवल TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के नाम पर असुरक्षित नहीं किया जाना चाहिए।

अवरोध व मांग:

शिक्षकों का तर्क है कि जब सरकार या विभाग द्वारा नियमित रूप से TET परीक्षा आयोजित ही नहीं की जा रही है, तो सेवारत शिक्षक पात्रता कैसे हासिल करें? मंच मांग कर रहा है कि शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का पर्याप्त और नियमित अवसर दिया जाए, और तब तक वरिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति या सेवा को बाधित न किया जाए।

प्रशासनिक असंतोष की आशंका:

नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास राजपूत ने चेतावनी दी है कि वरिष्ठ शिक्षकों को उनके पदोन्नति के अधिकार से वंचित करना और उनकी जगह कनिष्ठ शिक्षकों को आगे बढ़ाना प्रशासनिक असंतोष और गंभीर वेतन विसंगति को जन्म दे सकता है।

मांग: विभाग में वर्षों की लंबी सेवा देने वाले शिक्षकों की वरिष्ठता और अनुभव का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।

मौसम की बेरुखी और दुष्प्रचार के बावजूद ऐतिहासिक भागीदारी

सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब: सरगुजा से लेकर बस्तर तक, और बिलासपुर से धमतरी व जांजगीर-सक्ती (जैसे जैजहर और महासमुंद ब्लॉक) तक हर तरफ शिक्षकों का आक्रोश स्पष्ट दिखाई दिया।

संघर्ष की मिसाल: मूसलाधार बारिश और तमाम कथित दुष्प्रचारों के बावजूद छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय आह्वान पर शिक्षक बड़ी संख्या में स्कूलों से निकलकर सड़कों पर डटे रहे। इसे शिक्षकों ने किसी सरकार के विरोध में नहीं, बल्कि अपने हक और अस्तित्व की लड़ाई बताया है।

शिक्षक नेताओं की दो टूक चेतावनी

रविंद्र राठौर (प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन):

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सरकार के किसी भी तुगलकी फरमान के विरुद्ध शिक्षकों का खुला आक्रोश है। यदि सरकार ने समय रहते शिक्षकों की पीड़ा को नहीं समझा और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो यह संघर्ष और अधिक व्यापक होगा।

विकास राजपूत अध्यक्ष नवीन शिक्षक संघ ने कहा

नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास राजपूत ने चेतावनी दी है कि वरिष्ठ शिक्षकों को उनके पदोन्नति के अधिकार से वंचित करना और उनकी जगह कनिष्ठ शिक्षकों को आगे बढ़ाना प्रशासनिक असंतोष और गंभीर वेतन विसंगति को जन्म दे सकता है।

प्रदीप पाण्डेय (अध्यक्ष, सर्व शिक्षक संघ) एवं इरफान सैय्यद (प्रदेश प्रवक्ता):

नेताओं ने जोर देकर कहा कि शिक्षक केवल न्याय, मानसिक तनाव से मुक्ति और अपने भविष्य की सुरक्षा चाहते हैं। मोदी की गारंटी के तहत पूर्व में किए गए वादों को पूरा किया जाए तथा नीतिगत निर्णयों से पहले शिक्षक संगठनों से सार्थक संवाद हो।

छत्तीसगढ़ के अलग अलग विकास खंड में आंदोलन की बोलती तस्वीरों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिन भी शिक्षकों ने आज अपनी जायज मांगों के लिए अपनी आवाज बुलंद की वो व्यर्थ नहीं जाने वाली । इसका असर दूर तक होगा ।

बलरामपुर की तस्वीर

​पलारी की तस्वीर

शिक्षक साझा मंच की मुख्य मांगें

सेवारत शिक्षकों की सेवा पूर्ण रूप से सुरक्षित की जाए।

TET परीक्षा से वंचित शिक्षकों के लिए स्पष्ट और नियमित अवसर सुनिश्चित किए जाएं।

TET अनिवार्यता के आड़े आने से वरिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति प्रभावित न हो।

पूर्व सेवा की गणना करते हुए क्रमोन्नति, पेंशन और वेतन विसंगति दूर की जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button