राज्य कर्मचारी संघ ने टीईटी अनिवार्यता खत्म करने की मांग को लेकर सांसदों को सौंपा ज्ञापन: संसद में अध्यादेश लाने की पुरजोर मांग प्रधानमंत्री के नाम दिया ज्ञापन

रायपुर/राजनांदगांव/दुर्ग
प्रवक्ता.कॉम 20 अगस्त 2026
2010 से पूर्व नियुक्त देश और प्रदेश के लाखों सेवारत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त कराने के लिए राज्य कर्मचारी संघ का आंदोलन अब मुखर हो गया है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के प्रमुख सांसदों से मुलाकात कर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया है और संसद में इस पर उचित अध्यादेश लाने की मांग की गई है।
सांसदों से भेंट कर शिक्षकों ने रखी अपनी पीड़ा
राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी चेलक और प्रांतीय महामंत्री बोधी राम निषाद के नेतृत्व में तथा राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ के दिग्गज सांसदों से मुलाकात की। बालोद जिला अध्यक्ष वीरेंद्र देशलहरे और जिला सचिव गजेंद्रपुरी गोस्वामी ने बताया कि संघ के प्रतिनिधियों ने सांसदों से मिलकर ज्ञापन सौंपा और संसद में इस महत्वपूर्ण मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का आग्रह किया:मुख्य तौर पर राज्य कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों ने
लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल

लोकसभा सांसद संतोष पाण्डेय

लोकसभा सांसद विजय बघेल

राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा

राज्यसभा सांसद फुलोदेवी नेताम
क्या है प्रमुख मांगें?
विधिक संरक्षण की गुहार:
संघ ने मांग की है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) या अन्य प्रासंगिक कानूनों में आवश्यक संशोधन किया जाए, ताकि पिछले 15 से 30 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे इन अनुभवी शिक्षकों की वरिष्ठता, पदोन्नति और सेवा सुरक्षा पर कोई आंच न आए।
संसद में आवाज उठाने का अनुरोध:
सांसदों से आग्रह किया गया है कि वे देश के लाखों शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष इस विषय को रखें और संसद में अध्यादेश लाकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें।
राज्य कर्मचारी संघ ने उम्मीद जताई है कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से यह आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचेगी और देश के सेवारत शिक्षकों को इस जटिल अनिवार्यता से बड़ी राहत मिलेगी





