मानसिक तनाव और काम के बढ़ते दबाव के बीच: कब मिलेगा शिक्षकों को सुकून? ऐसी परिस्थिति कभी नहीं निर्मित हुई ! शिक्षा विद के अनुसार ऐसा माहौल शिक्षा पर आघात जैसा
डिजिटल जंजाल और मानसिक तनाव के साये में शिक्षक: 34 एप्स, ऑनलाइन हाजिरी और टीईटी के बोझ तले घुटता अध्यापन
प्रवक्ता.कॉम 20 अगस्त 2026
(विजय सिंह ठाकुर)
एक तरफ वीएसके (VSK) एप की तकनीकी खामियां, ऑनलाइन हाजिरी का झंझट और 34 से अधिक डिजिटल एप्स पर लगातार डाटा अपलोड करने का दबाव, तो दूसरी तरफ टीईटी परीक्षा और पदोन्नति का संकट—इन सभी दोतरफा मारों से जूझते हुए शिक्षक इन दिनों भारी मानसिक घुटन और तनाव से गुजर रहे हैं।
कागजी और डिजिटल कार्रवाईयों के बीच घुटता अध्यापन
34 से अधिक एप्स का बोझ: शिक्षकों का अधिकांश समय अब बच्चों को पढ़ाने के बजाय मोबाइल स्क्रीन पर विभिन्न पोर्टल्स और 34 से अधिक डिजिटल एप्स पर अटेंडेंस और डाटा फीड करने में ही बीत रहा है।
बढ़ती मानसिक चिंता: शिक्षा विभाग और सरकार द्वारा कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और वेलनेस (Mental Wellness) के लिए प्रशिक्षण देने और तनाव प्रबंधन की बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर शिक्षकों की स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।
तनावमुक्त माहौल की सख्त जरूरत: शिक्षाविदों और जानकारों का मानना है कि जब तक शिक्षकों को इस तरह के कागजी और तकनीकी मानसिक दबाव से मुक्त नहीं किया जाएगा, तब तक वे पूरी क्षमता से शिक्षण कार्य नहीं कर पाएंगे। शिक्षकों के लिए एक सहज, तनावमुक्त और सुरक्षित कार्यस्थल का होना बेहद आवश्यक है।
प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत का फर्क
एक समय सरकारी स्तर पर कर्मचारियों और शिक्षकों को कार्यस्थल के तनाव से उबारने के लिए वेलनेस प्रोग्राम और मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण देने की बात कही गई थी, लेकिन आज भी शिक्षक हर दिन तकनीकी और प्रशासनिक उलझनों के कारण गहरे तनाव में जीने को मजबूर हैं।
जिम्मेदारों से सवाल: क्या शिक्षकों को मानसिक संबल और एक बेहतर कार्य-संस्कृति देने के लिए विभाग केवल कागजी निर्देश जारी करता रहेगा, या वाकई उनकी इन गंभीर समस्याओं का कोई ठोस समाधान निकलेगा?
शिक्षाविद् दानी राम वर्मा के नजरिए से: तनावमुक्त और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल की परिकल्पना
शिक्षाविद् दानी राम वर्मा के अनुसार, एक शिक्षक से उत्कृष्ट परिणामों की उम्मीद तभी की जा सकती है जब उसे एक ऐसा कार्यस्थल मिले जो भय, अत्यधिक कागजी और डिजिटल दबाव से पूरी तरह मुक्त हो। उनके दृष्टिकोण के अनुसार एक आदर्श शैक्षणिक और तनावमुक्त माहौल निम्नलिखित स्तंभों पर आधारित होना चाहिए:
शिक्षाविद् दानी राम वर्मा के अनुसार आदर्श माहौल में क्या होना चाहिए –
शिक्षण और अध्यापन को प्राथमिकता:
शिक्षाविद् का मानना है कि शिक्षकों का मुख्य दायित्व बच्चों को पढ़ाना और उनका बौद्धिक विकास करना है। उनका अधिकांश समय मोबाइल एप्स पर डाटा फीडिंग या ऑनलाइन हाजिरी जैसी तकनीकी उलझनों में बर्बाद नहीं होना चाहिए।
मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा:
शिक्षकों पर अनावश्यक प्रशासनिक और विभागीय दबाव नहीं होना चाहिए। जब शिक्षक मानसिक रूप से शांत और सुरक्षित महसूस करेगा, तभी वह कक्षाओं में ऊर्जावान और सकारात्मक तरीके से पढ़ा पाएगा






