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टीईटी प्रकरण पर 21 अप्रैल को स्टेट ऑफ त्रिपुरा वर्सेज सजल देव मामले की नहीं हुई सुनवाई देश भर के शिक्षकों पर पड़ेगा फैसले का असर इस मामले में सरकार हाईकोर्ट में हार चुकी है केस

प्रवक्ता.कॉम 21 अप्रैल 2026

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दिल्ली/ त्रिपुरा/ मध्यप्रदेश

21 अप्रैल को देश भर के शिक्षकों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए लिस्टेड SLP(C) No. 015087 -015097 / 2025 Registered on 20-05-2025 (Verified On 14-05-2025) । स्टेट ऑफ त्रिपुरा विरुद्ध सजल देव केस की सुनवाई पर टिकी हुई थी । 21 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 8 में, जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच के सामने यह मामला आइटम नंबर 24 के रूप में सूचीबद्ध (Listed) था। हालाँकि, इस दिन मामले की सुनवाई नहीं हो सकी।

केस का नंबर सुनवाई हेतु क्रम पर नहीं आ पाया

​सुनवाई न होने का मुख्य कारण यह था कि कोर्ट में मामलों की सुनवाई क्रमानुसार होती है और उस दिन केवल 18 या 19 नंबर तक के केस ही सुने जा सके। समय के अभाव के कारण 24वें नंबर पर मौजूद इस केस की बारी नहीं आ पाई।

क्या है पूरा मामला समझें

स्टेट ऑफ त्रिपुरा विरुद्ध सजल देब एक महत्वपूर्ण मामला है जो कि टीईटी की अनिवार्यता को पुराने शिक्षकों पर लागू किया जा सकता है या नहीं इस सवाल से जुड़ा है। इस केस में 16जुलाई 2024 को त्रिपुरा हाईकोर्ट ने सजल देब के पक्ष में फैसला देते हुए कहा था कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी लागू नहीं किया जा सकता। सरकार उन्हें रेग्यूलाईज करे उनके सर्विस बेनिफिट्स रोके नहीं जा सकते। इस निर्णय के संबंध में हाईकोर्ट ने मुख्य रूप से कहा था कि किसी नियम को retrospectice( बाद में या पीछे से) तरीके से लागू नहीं किया जा सकता।

इस मामले में त्रिपुरा सरकार कोर्ट गई है हाईकोर्ट का फैसला शिक्षकों ओ पक्ष में है

कोर्ट हार के बाद त्रिपुरा स्टेट की सरकार ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार का तर्क रखते हुए कहा:

1. शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए TET जरूरी है

2. SSA के तहत हुई नियुक्तियां regular recruitment नहीं थीं।

3. इसलिए TET लागू किया जा सकता है।

शिक्षकों का तर्क

शिक्षकों की ओर से मुख्य तर्क:

1. नियुक्ति 2010 notification से पहले हुई

2. इसलिए TET लागू करना retrospective application होगा

3. कई शिक्षक 20 साल से सेवा दे रहे हैं

4. अब TET लागू करना Article 14 और 16 के खिलाफ होगा।—

सुप्रीम कोर्ट के लिए मुख्य कानूनी सवाल

इस केस में सुप्रीम कोर्ट को 3 मुख्य सवाल तय करने हैं: क्या TET पुराने शिक्षकों पर लागू हो सकता है? क्या NCTE notification retrospective हो सकता है? क्या SSA के शिक्षक regular teachers माने जाएंगे या contractual?-

देशभर के शिक्षकों के लिए इसका महत्व

अगर सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखता है:तो संभावित परिणाम:pre-2011 teachers को TET से छूटregularizationpromotionservice protection इसका असर इन राज्यों पर पड़ सकता है:

मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश बिहारपश्चिम बंगाल त्रिपुरा-. दूसरा संभावित परिणामअगर सुप्रीम कोर्ट सरकार के पक्ष में फैसला देता है:TET सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य माना जा सकता हैgrace period दिया जा सकता है।

बिना TET वालों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है

अभी की स्थिति केस pending है कोई final judgment अभी नहीं आयाअगली सुनवाई की तारीख cause list में आने पर स्पष्ट होगयह केस पूरे देश के पुराने शिक्षकों के भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण केस बन सकता है क्योंकि इसमें तय होगा:क्या TET नियम पुराने शिक्षकों पर लागू किया जा सकता है या नहीं।

सुप्रीम में केस कब लिस्टेड होगा जल्द अपडेट मिलेगा
​सजल देव मामले के अलावा, एक और महत्वपूर्ण सुनवाई 24 अप्रैल 2026 को होने वाली है। यह एक पुनर्विचार याचिका (Review Petition) है, जो 1 सितंबर 2025 को आए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ है जिसे शिक्षक संगठनों द्वारा “काला फैसला” कहा जा रहा है। ​शिक्षक संगठनों की मांग है कि:
​जब तक पुनर्विचार याचिका पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक 1 सितंबर 2025 के फैसले पर रोक लगाई जाए।

सुनवाई की संभावना: चूंकि 21 अप्रैल को केस लिस्टेड था लेकिन सुना नहीं गया, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इसे 22 अप्रैल या उसके तुरंत बाद के किसी भी कार्यदिवस में फिर से लिस्ट कर सकता है।

​वेबसाइट अपडेट का इंतजार:

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अगली किसी निश्चित तारीख का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन उम्मीद है कि एक-दो दिनों के भीतर ही नई तारीख अपडेट हो जाएगी।

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