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मध्य प्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी उठी मांग: सरकारी नौकरियों में ‘दो बच्चों’ की शर्त हटाने की मांग तेज

भोपाल /रायपुर

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प्रवक्ता.कॉम 11 जून 2026
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों में ‘दो बच्चों की अनिवार्यता’ संबंधी प्रावधान को निरस्त करने के ऐतिहासिक फैसले के बाद, अब छत्तीसगढ़ में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस ड्राफ्ट को पोर्टल से विलोपित करने के आदेश के बाद, वहां के लाखों कर्मचारियों और नौकरी के इच्छुक युवाओं ने राहत की सांस ली है। इस घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों और अभ्यर्थियों को भी लामबंद कर दिया है, जो लंबे समय से इसी तरह के स्पष्ट नीतिगत बदलाव की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
​मध्य प्रदेश में क्या बदला?


​मध्य प्रदेश सरकार ने 2001 से लागू उस विवादास्पद नियम को समाप्त कर दिया है, जिसके तहत दो से अधिक जीवित संतान होने पर उम्मीदवार को सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जाता था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में पोर्टल से ड्राफ्ट हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे अब न केवल नई नियुक्तियों में यह शर्त खत्म हो गई है, बल्कि सेवारत कर्मचारियों को भी तीसरा बच्चा होने पर मिलने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर से मुक्ति मिल गई है।
​छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों में उम्मीद
​मध्य प्रदेश के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में भी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी संघों का कहना है कि जिस तरह मध्य प्रदेश ने स्पष्ट आदेश जारी कर संशय खत्म किया है, वैसी ही स्पष्टता छत्तीसगढ़ में भी आवश्यक है।
​क्यों है मांग?

हालांकि छत्तीसगढ़ में सरकार ने पूर्व में इस संबंध में कुछ शिथिलता दी थी, लेकिन कर्मचारी संघों का तर्क है कि अब भी कई नियमावलियों में अस्पष्टता बनी हुई है।
​भविष्य की चिंता: संघों के प्रतिनिधियों का कहना है कि बिना स्पष्ट सरकारी आदेश और नियमों के विलोपन के, प्रशासनिक स्तर पर कभी भी व्याख्यात्मक मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं, जिससे कर्मचारियों को अनावश्यक मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।
​प्रशासनिक नजीर:

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश का यह कदम एक ‘मॉडल’ के रूप में काम कर रहा है। छत्तीसगढ़ के युवा और कर्मचारी अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से अपेक्षा कर रहे हैं कि वे भी मध्य प्रदेश की तर्ज पर राज्य के नियमों की समीक्षा करें और इसे लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करें।
​क्या कदम उठा सकती है सरकार?
​राजनीतिक जानकारों के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार यदि इस पर विचार करती है, तो उसे अपनी भर्ती नियमावली (Recruitment Rules) और सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियमों में संशोधन करना होगा। यदि सरकार इस दिशा में निर्णय लेती है, तो यह राज्य के हजारों उन युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी होगी जो परिवार नियोजन से जुड़ी चिंताओं के कारण सरकारी नौकरी के प्रति सशंकित रहते हैं।
​फिलहाल, प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इस विषय पर चर्चाओं का बाजार गर्म है और अब सबकी नजरें आगामी कैबिनेट बैठकों और सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों पर टिकी हैं।

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