मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती में NIOS से D.El.Ed. डिग्री अमान्य, 28 अभ्यर्थी अपात्र घोषित; छत्तीसगढ़ सरकार ने सेवारत व निजी शिक्षकों को दिया था बड़ा अवसर विशेषज्ञों ने कहा डिग्री मान्य

देवास / रायपुर: प्रवक्ता.कॉम 27 जुलाई 2026
देश भर में शिक्षक प्रशिक्षण और योग्यताओं को लेकर चल रहे नीतिगत बदलावों के बीच मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों से दो बिल्कुल अलग और विपरीत तस्वीरें सामने आई हैं। मध्य प्रदेश के देवास सहित विभिन्न जिलों में प्राथमिक शिक्षक पदस्थापना से पहले दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान एनआईओएस (NIOS – National Institute of Open Schooling) से डी.एल.एड. (D.El.Ed.) की डिग्री प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस डिग्री को वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में अमान्य करार देते हुए 28 अभ्यर्थियों को अपात्र घोषित कर दिया है। इसके विपरीत, छत्तीसगढ़ शासन ने अपनी प्रशासनिक और व्यावहारिक नीति के तहत हज़ारों सेवारत एवं निजी स्कूल शिक्षकों को NIOS के जरिए डी.एल.एड. करने का अवसर प्रदान कर उनके भविष्य को सुरक्षित किया था।
मध्य प्रदेश में कार्रवाई:
देवास जिले में दस्तावेज सत्यापन के दौरान NIOS D.El.Ed. डिग्री वाले 28 अभ्यर्थी और कम उम्र (21 वर्ष से कम) वाले 3 अभ्यर्थी अपात्र पाए गए।
अतिथि शिक्षकों पर भी सख्ती: पिछले तीन सालों में कम से कम 200 दिन शिक्षण कार्य का अनुभव पूरा न करने वाले अतिथि शिक्षकों को भी सूची से बाहर किया गया है।
छत्तीसगढ़ का सकारात्मक मॉडल: छत्तीसगढ़ सरकार ने सेवारत और निजी स्कूलों के शिक्षकों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए NIOS के माध्यम से डी.एल.एड. प्रशिक्षण का रास्ता साफ किया था।
मध्य प्रदेश में दस्तावेज सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बाहर
प्राथमिक शिक्षकों की पदस्थापना से पूर्व पिछले कुछ दिनों से शिक्षा विभाग द्वारा दस्तावेजों का गहन सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन के दौरान देवास में यह बात सामने आई कि कई अभ्यर्थियों ने एनआईओएस, नोएडा (उत्तर प्रदेश) से डी.एल.एड. की डिग्री प्राप्त की है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इस डिग्री को मान्य नहीं किए जाने के कारण इन्हें फिलहाल अपात्र घोषित कर दिया गया है। इसके अलावा, 3 ऐसे अभ्यर्थी भी सामने आए जिनकी आयु नियमानुसार 21 वर्ष से कम पाई गई थी।
जिला प्रशासन और शिक्षा अधिकारियों के अनुसार, अतिथि शिक्षक कोटे के तहत च्वाइस फिलिंग करने वाले वे अभ्यर्थी भी बाहर किए गए हैं जो तीन साल में 200 दिन पढ़ाने की अनिवार्यता को पूरा नहीं कर सके। पात्र पाए गए 111 अभ्यर्थियों को जल्द ही भोपाल से ऑनलाइन माध्यम से नियुक्ति पत्र जारी किए जाएंगे, जिसके बाद उन्हें 15 दिनों के भीतर संबंधित स्कूलों में कार्यभार संभालना होगा।
छत्तीसगढ़ सरकार का सराहनीय कदम: सेवारत शिक्षकों को दिया अवसर
एक तरफ जहाँ मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में NIOS D.El.Ed. धारकों के समक्ष कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें खड़ी हुई हैं, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार का दृष्टिकोण इस मामले में बेहद सकारात्मक और व्यावहारिक रहा है। पूर्व में जब राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षकों के लिए अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण किया गया था, तब छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के हज़ारों सेवारत और निजी विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की आजीविका और अनुभव को ध्यान में रखा।
छत्तीसगढ़ शासन ने इन शिक्षकों को बिना नौकरी गंवाए NIOS के माध्यम से दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के जरिए डी.एल.एड. कोर्स पूरा करने का सुनहरा अवसर और समयबद्ध अनुमति दी थी। इस निर्णय से न केवल छत्तीसगढ़ के हज़ारों शिक्षकों की योग्यता वैध हुई, बल्कि उनके परिवारों और निजी शिक्षा क्षेत्र को भी एक बड़ी स्थिरता प्राप्त हुई।
शिक्षाविदों ने कहा nios की डिग्री मान्य
शिक्षाविदों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक पात्रता और प्रशिक्षण के नियमों में एकरूपता न होने के कारण इस तरह की विरोधाभासी स्थितियां उत्पन्न हो रही हैं, जिससे देश भर के लाखों प्रशिक्षित युवा और सेवारत शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।





