श्रावण मास विशेष: भोरमदेव में संघ के घोष विभाग का भव्य आयोजन, शंख और वेणु की धुनों से गूंजा परिसर
भोरमदेव मंदिर परिसर में गूंजा घोष वादन: तीसरे वर्ष भी उत्साह के साथ संपन्न हुआ 'शंखनाद' कार्यक्रम
कबीरधाम/ भोरमदेव
प्रवक्ता.कॉम 24 अगस्त 2026
श्रावण मास के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जिला कबीरधाम के घोष विभाग द्वारा ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर परिसर में ‘भोरमदेव शंखनाद’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का यह तीसरा वर्ष रहा, जिसमें जिलेभर के स्वयंसेवकों ने अपनी कला और अनुशासन का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
अनुशासन और सामूहिकता का प्रतीक घोष वादन
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वयंसेवकों में अनुशासन, एकाग्रता, तालमेल, आत्मविश्वास और सामूहिकता जैसे गुणों का विकास करना है। इस उद्देश्य को साकार करने के लिए घोष वादन दल द्वारा लगभग दो महीने के कड़े और सतत अभ्यास के बाद लगभग 30 मिनट का आकर्षक घोष वादन प्रस्तुत किया गया। इस दौरान कुल 25 घोष वादकों के एक सुसज्जित दल ने सहभागिता दी।
शंख और वेणु की सुमधुर रचनाओं ने मोहा मन

कार्यक्रम में कुल आठ प्रमुख रचनाओं का अभ्यास और प्रदर्शन किया गया:
शंख की चार रचनाएँ:
किरण, उदय, श्रीराम और सोनभद्र।
वेणु (बंशी) की चार रचनाएँ:
भूप, मीरा, तिलंग और शिवरंजनी।
प्रस्तुति के दौरान शंख (बिगुल), वेणु (बंशी), आनक (ड्रम), प्रणव (बड़ा ड्रम), झल्लारी और त्रिभुज जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का प्रभावी प्रयोग किया गया, जिसका संचालन घोष दंड के माध्यम से किया गया।
गरिमामयी उपस्थिति और उत्साहवर्धन

कार्यक्रम को दो चरणों में प्रस्तुत किया गया, जिसमें स्वयंसेवकों ने सामूहिक घोष वादन और कला का प्रदर्शन किया। जिला घोष प्रमुख के अनुसार, घोष केवल वादन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व में समन्वय और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम की सफलता में दुर्ग विभाग शारीरिक शिक्षण प्रमुख सीताराम धुर्वे, जिला घोष प्रमुख मनहरण वरबे के साथ-साथ वरिष्ठ एवं बाल स्वयंसेवकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस अवसर पर भोरमदेव सनातन तीर्थ समिति के सदस्य, बड़ी संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया।






