हरित और समृद्ध छत्तीसगढ़ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही साय सरकार: वन मंत्री केदार कश्यप
प्रदेश में वर्ष 2022 में बाघों की संख्या 18 थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 35 हो गई है। 2,829 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाला 'गुरु घासीदास-तमोर पिंगला' देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बना है।
नवा रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता तथा संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने नवा रायपुर अटल नगर स्थित ‘छत्तीसगढ़ संवाद’ के प्रेक्षक गृह (ऑडिटोरियम) में आयोजित प्रेस वार्ता में विभागीय गतिविधियों और उपलब्धियों का ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार “हरित छत्तीसगढ़, समृद्ध छत्तीसगढ़” के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है।
वन मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार के लिए वन संरक्षण का दायरा केवल वनों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वनवासियों की समृद्धि, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, किसानों की आय में वृद्धि, युवाओं-महिलाओं के लिए रोजगार, वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक तकनीक से बेहतर वन प्रबंधन इसकी मुख्य प्राथमिकताएं हैं।
प्रमुख विभागीय उपलब्धियां:

बाघों की संख्या में 94% की ऐतिहासिक वृद्धि: प्रदेश में वर्ष 2022 में बाघों की संख्या 18 थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 35 हो गई है। 2,829 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाला ‘गुरु घासीदास-तमोर पिंगला’ देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बना है।
किसान वृक्ष मित्र योजना: 5 एकड़ तक 100% और उससे अधिक पर 50% वित्तीय अनुदान का प्रावधान है। पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ कृषि भूमि पर 3.675 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए।
तेन्दूपत्ता संग्रहण एवं वनवासी कल्याण: राज्य में तेन्दूपत्ता संग्रहण दर देश में सर्वाधिक 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा है। वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों द्वारा 13.85 लाख मानक बोरा संग्रहण पर 757 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया। चरण पादुका योजना के तहत 12.40 लाख महिला संग्राहकों को लाभान्वित किया गया, वहीं वर्ष 2026 में 12.38 लाख पुरुष संग्राहकों को वितरण प्रस्तावित है।
बस्तर में शांति और 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार: माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा सुधार के बाद दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर के सुदूर वनों में इमारती लकड़ी और बांस विदोहन के कार्य पुनः प्रारंभ किए जा रहे हैं, जिससे 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण:
बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्या 77 से बढ़कर 200 के पार पहुंच गई है, जिसकी सराहना प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में की।
बिलासपुर के कोपरा जलाशय को राज्य का पहला ‘रामसर साइट’ घोषित किया गया है। 2030 तक 20 रामसर साइट बनाने का लक्ष्य है।
मानव-हाथी द्वंद्व कम करने के लिए ‘गज संकेत’ ऐप और ‘गजरथ यात्रा’ शुरू की गई।
कांगेर घाटी को यूनेस्को पहचान: कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को की अस्थायी सूची में स्थान मिला है। बस्तर के धुड़मारास को सामुदायिक पर्यटन के रूप में विकसित किया गया है।
तकनीक आधारित वन प्रशासन: विभाग में end-to-end डिजिटलाइजेशन लागू कर RBI के e-Kuber से जोड़ा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,520 करोड़ रुपये से अधिक का ऑनलाइन भुगतान किया गया। साथ ही, फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम से रिस्पॉन्स टाइम घटाकर 5-10 मिनट कर दिया गया है।






