वायरल होना लक्ष्य नहीं, विश्वसनीयता ही पहचान’: बिलासपुर में #Team_HallaBol के प्रांतीय अधिवेशन में मिला सुरक्षा मंत्र
सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के सभी संभागों, जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से सैकड़ों डिजिटल राष्ट्रवादी और सोशल मीडिया वॉरियर्स पहुंचे हैं। इस वर्ष कार्यशाला का मुख्य एजेंडा "डिजिटल युग का नया डाका – साइबर अपराध, आईटी एक्ट और हमारी डिजिटल जिम्मेदारी" तय किया गया है
बिलासपुर प्रवक्ता.कॉम 11 सितंबर 2026
बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर के तिफरा स्थित झूलेलाल मंगलम में 11 सितंबर से राष्ट्रवादी मंच ‘#Team_HallaBol’ के दो दिवसीय (11-12 सितंबर) प्रदेश स्तरीय कार्यशाला, प्रांतीय अधिवेशन एवं सम्मान समारोह का आगाज हुआ। इस सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के सभी संभागों, जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से सैकड़ों डिजिटल राष्ट्रवादी और सोशल मीडिया वॉरियर्स पहुंचे हैं। इस वर्ष कार्यशाला का मुख्य एजेंडा “डिजिटल युग का नया डाका – साइबर अपराध, आईटी एक्ट और हमारी डिजिटल जिम्मेदारी” तय किया गया है।
प्रमुख दिग्गज नेताओं का मार्गदर्शन
इस आयोजन में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, विधायक अमर अग्रवाल, पवन साय, सुशांत शुक्ला, धर्मजीत सिंह और पंकज झा जैसे वरिष्ठ राजनीतिक व सामाजिक दिग्गजों का मार्गदर्शन मिल रहा है। कार्यक्रम के संचालन में समन्वय समिति के सदस्य प्रवीण दुबे, पुरुषोत्तम अग्रवाल, अभय सिंह ठाकुर, विनोद अग्रवाल और पवन गर्ग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
जलियांवाला बाग के शहीदों की स्मृति से उद्भव
संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि ‘हल्ला बोल’ मंच की शुरुआत 13 अप्रैल 2019 को जलियांवाला बाग हत्याकांड के 100 वर्ष पूर्ण होने पर शहीदों की स्मृति में हुई थी। इसका उद्देश्य देशविरोधी व वामपंथी नैरेटिव को ध्वस्त करना है। यह मंच का चतुर्थ प्रांतीय अधिवेशन है, इससे पहले रतनपुर और दुर्ग में इसके सफल आयोजन हो चुके हैं।
तकनीकी सत्र और ‘डिजिटल एथिक्स’ के 5 सूत्र

अधिवेशन के दौरान साइबर फ्रॉड (डिजिटल अरेस्ट, यूपीआई-ओटीपी फ्रॉड, डीपफेक) से बचाव के लिए कार्यकर्ताओं को “Think Before You Click, Verify Before You Trust” का सुरक्षा मंत्र दिया गया और साइबर हेल्पलाइन 1930 का उपयोग करने की सलाह दी गई। इसके साथ ही जिम्मेदार सोशल मीडिया संचालन के लिए 5 मुख्य सूत्र साझा किए गए:
प्लेटफॉर्म की समझ: प्रत्येक प्लेटफॉर्म की प्रकृति के अनुसार संयमित संवाद।
तथ्य जांच: बिना पुष्टि के कोई मैसेज फॉरवर्ड न करना।
स्रोत की पहचान: अफवाहों को रोकने की सामूहिक जिम्मेदारी।
मर्यादा और संस्कृति: सनातन संस्कृति का उपहास उड़ाने वाली ताकतों को तथ्यों से बेनकाब करना।
- पुष्टि के बाद साझा: राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर प्रामाणिक सूचनाएं ही प्रसारित करना।
संगठन ने “विश्वसनीयता ही पहचान” के संकल्प के साथ उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मानित करने और आगामी राष्ट्रव्यापी कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया है






