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VSK APP में तकनीकी खामी और वेतन रोकने के तुगलकी फरमान से भड़के शिक्षक, वाणिज्य विकास संघ ने सचिव व DPI संचालक को सौंपा ज्ञापन

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रायपुर (छत्तीसगढ़) | 19 जून 2026

​छत्तीसगढ़ में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए अभी महज तीन दिन ही बीते हैं, लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग के अव्यवहारिक और नित-नये आदेशों ने पूरे प्रदेश के शिक्षकों को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है। जहाँ सत्र के शुरुआती दिनों में स्कूलों में बच्चों के प्रवेश और पढ़ाई पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए थी, वहाँ शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति, नेटवर्क की लुकाछिपी और सर्वर डाउन होने की समस्या से जूझ रहे हैं।

​इस बीच लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी उस नए आदेश ने आग में घी का काम किया है, जिसमें ‘वीएसके एप’ (VSK App) में ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज न होने पर जून माह का वेतन रोकने का निर्देश दिया गया है। विभाग के इस तुगलकी फरमान के खिलाफ ‘छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ’ (पंजीयन क्रमांक: 122202435951) ने मोर्चा खोल दिया है। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव एवं डीपीआई संचालक को अपनी 5 सूत्रीय मांगों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

अधिकारी वनांचल में जाकर देखें नेटवर्क की हकीकत: विष्णु प्रसाद साहू

​छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ के संयोजक एवं प्रदेश अध्यक्ष विष्णु प्रसाद साहू ने कड़ा बयान जारी करते हुए कहा:

​”अधिकारी यह अच्छी तरह से समझ लें कि शिक्षक ऑनलाइन अटेंडेंस का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे वीएसके एप में मौजूद तकनीकी खामियों, सर्वर की लचर स्थिति और निजता (Privacy) के हनन से परेशान हैं। सत्र के पहले ही दिन एप ने काम करना बंद कर दिया, जिससे सैकड़ों शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाई। सुदूर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में दिन भर शिक्षक स्कूल छोड़कर नेटवर्क की खोज में पहाड़ियों और मैदानों में भटक रहे हैं। अगर विभाग को ऑनलाइन हाजिरी की इतनी ही चिंता है, तो वह हर स्कूल में आधिकारिक डिवाइस, बायोमैट्रिक मशीन और हाई-स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था करे।”

व्याख्याता संघ ने ज्ञापन में उठाईं ये 5 प्रमुख मांगें:

  • 1. सेटअप 2008 के आधार पर वाणिज्य व्याख्याताओं के 02 पद दिए जाएं: वर्ष 2008 के सेटअप के तहत प्रत्येक विद्यालय के वाणिज्य संकाय में व्याख्याता के 02 पद स्वीकृत थे। परंतु वर्ष 2011-12 के बाद हाई स्कूल से हायर सेकेंडरी में अपग्रेड हुए स्कूलों में वाणिज्य के लिए केवल 01 पद दिया जा रहा है। पिछले 3-4 वर्षों के बोर्ड नतीजों में वाणिज्य संकाय के 75% छात्र टॉप-10 में रहकर राज्य का मान बढ़ा रहे हैं। छात्रों की अभूतपूर्व वृद्धि को देखते हुए संघ मांग करता है कि अपग्रेड स्कूलों में भी वाणिज्य के 2 पद बहाल किए जाएं।
  • 2. कैशलेस चिकित्सा योजना का तत्काल क्रियान्वयन हो: विधानसभा के बजट सत्र में माननीय वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी द्वारा प्रदेश के कर्मचारियों के लिए ‘कैशलेस चिकित्सा’ की ऐतिहासिक घोषणा की गई थी, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण इसका क्रियान्वयन अब तक नहीं हो सका है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षक साथी इलाज के लिए आर्थिक व मानसिक रूप से टूट रहे हैं। इस योजना को तुरंत लागू किया जाए।
  • 3. पारदर्शी ‘ओपन ट्रांसफर’ की शुरुआत हो: वर्ष 2022 के बाद से प्रदेश में सामान्य/ओपन ट्रांसफर पर रोक लगी हुई है। इसके चलते हजारों शिक्षक अपने घर-परिवार से सैकड़ों किलोमीटर दूर वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं और मानसिक तनाव में हैं। वहीं दूसरी ओर, ऊंची पहुंच वाले लोगों के तबादले पिछले दरवाजे से लगातार जारी हैं। संघ ने मांग की है कि सभी के लिए एक पारदर्शी और खुली स्थानांतरण नीति लागू की जाए।
  • 4. जनगणना कार्य के बदले मिले ‘अर्जित अवकाश’ (EL): भीषण गर्मी और नौतपा के बीच मई महीने में शिक्षकों और कर्मचारियों ने राष्ट्रीय महत्व के ‘जनगणना कार्य’ को पूरी निष्ठा के साथ समय सीमा में पूरा किया है। ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान किए गए इस कार्य के बदले शिक्षकों को नियमानुसार ‘अर्जित अवकाश’ प्रदान किया जाए।
  • 5. वेतन रोकने का आदेश तत्काल वापस हो: तकनीकी और सर्वर की त्रुटियों के कारण वीएसके एप में हाजिरी न बनने पर शिक्षकों का जून माह का वेतन रोकने संबंधी अव्यवहारिक निर्देश को तत्काल निरस्त किया जाए।

ये रहे उपस्थित:

​ज्ञापन सौंपने के दौरान छत्तीसगढ़ व्याख्याता वाणिज्य विकास संघ की प्रदेश उपाध्यक्ष ममता वाडदे, प्रदेश सहउपाध्यक्ष गीता नायर, प्रदेश संचालक खोमन लाल साहू, प्रदेश सचिव विवेक धुर्वे, प्रदेश संरक्षक जगदीश दिल्लीवार उपस्थित रहे।

​इसके साथ ही जिला अध्यक्षों और कार्यवाहकों में अनिता घोरपडे (धमतरी), मधुसूदन सिंह (बीजापुर), लक्ष्मीनारायण साहू (बेमेतरा), शिवशंकर सिंह (बस्तर), भारती साहू (राजनांदगांव), रश्मि पटेल (रायपुर), चंद्रकला साहू (सरगुजा), जीसी देवांगन (जांजगीर-चांपा), योगेश्वर दिवान (गरियाबंद), रवि गुप्ता (कवर्धा), संजय देवांगन (अंबागढ़ चौकी), सुधीर दूबे (जशपुर), नवीन साहू, मृत्युंजय भारती (धमतरी), श्याम द्विवेदी (महासमुंद), सीबा (बालोद), दीपक (रायगढ़), विनय साहू (कांकेर), उमाशंकर साहू (दंतेवाड़ा), वासु देवांगन (मानपुर-मोहला), अनिल जैन (जगदलपुर), चेतना गुप्ता व प्रतिभा लिमशाकरे (रायपुर) सहित प्रदेशभर के सैकड़ों वाणिज्य व्याख्याता एकजुट रहे।

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