शिक्षकों पर चौतरफा मार– परीक्षा परिणाम का दबाव, ‘सेवा संकल्प’ में हाजिरी और अब SIR ड्यूटी, नेताओं के कार्यक्रमों में भी भीड़ जुटाने की मजबूरी

रायपुर प्रवक्ता.कॉम 12 अक्टूबर 2026
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षक इन दिनों अत्यधिक मानसिक दबाव और प्रशासनिक बोझ के तले दबते नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बोर्ड और वार्षिक परीक्षाओं में बेहतर परिणाम लाने का कड़ा निर्देश दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों से लगातार गैर-शैक्षणिक कार्य कराए जा रहे हैं। हाल ही में शुरू हुए ‘सेवा संकल्प’ अभियान, नेताओं के दौरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भीड़ बढ़ाने की अघोषित जिम्मेदारी के बाद अब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और BLO ड्यूटी का अतिरिक्त बोझ भी शिक्षकों पर डाल दिया गया है।
शिक्षकों का कहना है कि पढ़ाई के मुख्य समय में जब विद्यार्थियों की तैयारी और रिविजन कराया जाना चाहिए, तब उन्हें प्रशासनिक व राजनीतिक आयोजनों में व्यस्त रखा जा रहा है। इससे न केवल उनका समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि आगामी परीक्षाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और परिणाम पर भी गहरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
नेताओं के कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने की अघोषित ड्यूटी
शिक्षकों में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि आए दिन विभिन्न सरकारी आयोजनों और नेताओं के दौरों के समय उन्हें भीड़ बढ़ाने के काम में लगा दिया जाता है। इसके साथ ही ‘सेवा संकल्प’ जैसे विभिन्न अभियानों में भी शिक्षकों को मैदान में उतारा जा रहा है।
शिक्ष क संघों का कहना है
पढ़ाई का नुकसान
परीक्षा सिर पर है और बोर्ड परीक्षाओं (10वीं-12वीं) तथा स्थानीय परीक्षाओं (5वीं-8वीं) के लिए समय बहुत कम बचा है।
दोहरा दबाव
विभाग उत्कृष्ट परिणाम की मांग कर रहा है, लेकिन पढ़ाने का समय गैर-शैक्षणिक कार्यों में छिन रहा है।
SIR और BLO ड्यूटी ने बढ़ाईं मुश्किलें
निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता पुनर्सत्यापन अभियान के तहत BLO के रूप में अधिकांश शासकीय शिक्षकों को तैनात किया गया है।
हफ्ते में 4 दिन (बुधवार से शनिवार) शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें घर-घर जाकर सत्यापन, फोटो-वीडियो अपलोड करना और युवाओं के पंजीयन के लिए फॉर्म-6 भरवाना शामिल है।
दूसरी ओर, स्कूल शिक्षा विभाग VSK ऐप में ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर रहा है। यदि शिक्षक मैदान में ड्यूटी करते हैं तो ऐप पर अनुपस्थित दिखने का डर रहता है और यदि स्कूल जाते हैं तो SIR ड्यूटी प्रभावित होती है।
शिक्षकों की मांग: गैर-शैक्षणिक कार्यों से मिले मुक्ति
शिक्षक संगठनों और प्राचार्यों का कहना है कि आगामी फरवरी माह में जनगणना का काम भी संभावित है और 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो जाएगा। लगातार गैर-शैक्षणिक ड्यूटी लगने से स्कूली शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। शिक्षकों ने मांग की है कि परीक्षा अवधि तक उन्हें सभी प्रकार की गैर-शैक्षणिक ड्यूटियों से मुक्त रखा जाए, ताकि वे छात्रों की पढ़ाई और बेहतर परीक्षा परिणामों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।





