बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में 12 दिन पहले ही पर्यटकों के खुला नए सफारी सत्र का हुआ शानदार आगाज धुरवा नृत्य’ के साथ पर्यटकों का स्वागत
वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर समय से पहले खुले उद्यान के दरवाजे; बम्बू राफ्टिंग और धुरवा जनजातीय नृत्य रहेगा मुख्य आकर्षण
रायपुर प्रवक्ता.कॉम 22 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्थित विश्वप्रसिद्ध कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में इस बार पर्यटन प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और विशेष निर्देशों के तहत इस वर्ष का सफारी सत्र निर्धारित समय से पूरे 12 दिन पहले ही आरंभ कर दिया गया है। सत्र के समयपूर्व शुभारंभ से प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।

मंगलवार को मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री उत्तम गुप्ता ने आधिकारिक तौर पर सत्र का पहला टिकट जारी कर जिप्सी सफारी का विधिवत शुभारंभ किया। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए उद्यान के दरवाजे रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता के एक नए अध्याय के साथ खुल गए हैं।
रोमांच और संस्कृति का अनूठा संगम

मानसून के ठीक बाद शुरू हुए इस सत्र में पर्यटक प्रकृति की गोद में बने लोकप्रिय स्थलों—कोटमसर गुफा, कांगेर धारा और मनमोहक तीरथगढ़ जलप्रपात का दीदार कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, रोमांच के शौकीन पर्यटकों के लिए मांझीपाल क्षेत्र में बम्बू राफ्टिंग और कयाकिंग जैसी साहसिक जल क्रीड़ाओं (वाटर स्पोर्ट्स) का भी प्रबंध किया गया है।

इस बार का सबसे बड़ा आकर्षण बस्तर की मूल संस्कृति से रूबरू होना है। पर्यटकों को स्थानीय जनजातीय जीवनशैली से परिचित कराने के उद्देश्य से कोटमसर बैरियर पर इको विकास समिति द्वारा विशेष रूप से ‘धुरवा जनजातीय नृत्य’ का आयोजन किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से जहाँ एक ओर पर्यटकों को अनूठा सांस्कृतिक अनुभव मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय जनजातीय समुदायों के लिए आजीविका के नए द्वार भी खुलेंगे।
पर्यावरण संरक्षण: प्लास्टिक मुक्त सफारी पर कड़ा पहरा
पर्यटन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए उद्यान प्रशासन ने इस बार कड़े कदम उठाए हैं। उद्यान के निदेशक श्री गौतम नारायण पडिभार के निर्देशों के अनुसार, इस बार संपूर्ण क्षेत्र को ‘प्लास्टिक मुक्त सफारी’ जोन बनाया गया है।
उद्यान परिसर में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन की ओर से सभी पर्यटकों से पुरजोर अपील की गई है कि वे अपने साथ प्लास्टिक की बोतलें, कैरी बैग या पॉलीथिन सामग्री न लाएं तथा राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक पवित्रता व स्वच्छता बनाए रखने में अपना सहयोग दें।
स्थानीय आजीविका को मिलेगी रफ्तार
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि सफारी सत्र के समय से पहले शुरू होने से बस्तर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को एक नई गति मिलेगी। इससे न केवल होटल, परिवहन और गाइड जैसे क्षेत्रों से जुड़े स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि बस्तर की समृद्ध जैव विविधता और अनूठी संस्कृति को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिलने की भी पूरी उम्मीद है।





