प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर धरती है पंडरिया – वनांचल की छिपी खूबसूरती, सड़क व मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पर्यटकों की पहुंच से दूर
छत्तीसगढ़ का पंडरिया ब्लॉक प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों, मनमोहक पहाड़ियों और कल-कल बहती नदियों से परिपूर्ण है पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर उभर सकता है छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल को है विकास की योजना बनाने की जरूरत
पंडरिया (कवर्धा) /प्रवक्ता.कॉम 25 अक्टूबर 2026
मोहन सिंह राजपूत
छत्तीसगढ़ का पंडरिया ब्लॉक प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों, मनमोहक पहाड़ियों और कल-कल बहती नदियों से परिपूर्ण है। मैकल पर्वतमाला की तलहटी में बसा यह वनांचल क्षेत्र अपनी माटी की सौंधी खुशबू और अनछुए प्राकृतिक नजारों के कारण पर्यटकों को आकर्षित करने की भरपूर क्षमता रखता है, लेकिन शासन और प्रशासन की बेरुखी के चलते यह क्षेत्र आज भी उपेक्षित है। यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती और जलप्रपात प्रशासनिक उदासीनता के कारण लोगों की नजरों से ओझल हैं।
पर्यटकों को लुभाते हैं पंडरिया के ये अनछुए जलप्रपात
कंवलधार जलप्रपात: बोड़ला व पंडरिया ब्लॉक के मध्य बांकी के पास हाफ नदी पर स्थित यह प्रपात करीब 30 फीट की ऊँचाई से गिरता है। यहाँ तक पहुँचने के लिए 2 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है और नीचे उतरने के लिए सीढ़ियां या रास्ता नहीं है। पंडरिया से लगभग 50 किमी दूर स्थित इस स्थल पर यदि थोड़ी सी प्रशासनिक पहल हो, तो यह जिले का सबसे सुंदर पर्यटन केंद्र बन सकता है।
भैसाओदार जलप्रपात

वनांचल के ग्राम कौआनार से लगभग 2 किलोमीटर दूर स्थित इस जलप्रपात की ऊँचाई कम है, लेकिन दो तरफ की पहाड़ियों के बीच इसकी घाटी बेहद मनोरम है। घोघराकला से 2 किमी की पक्की सड़क न होने के कारण पर्यटकों को पैदल सफर करना पड़ता है।
लईका बुड़ान जलप्रपात

ब्लॉक मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर नेऊर-बाहपानी मार्ग पर स्थित है। यहाँ 20 फीट से अधिक ऊँचाई से पानी गिरता है और यहाँ साल के 9 से 10 महीने पानी का प्रवाह रहता है।
गोदगोदा जलप्रपात

नेऊर से कांदावानी मार्ग पर स्थित यह प्रपात करीब 15 फीट की ऊँचाई से गिरकर एक आकर्षक दृश्य बनाता है। यहाँ पहुँचने के लिए डेढ़ किलोमीटर नदी के रास्ते पैदल चलना पड़ता है।
आगर नदी जलप्रपात

सेंदुरखार से निकलने वाली आगर नदी पर तेलियापानी और चुलटोला के पास लगभग 50 फीट की ऊँचाई पर यह सुंदर जलप्रपात बनता है, किंतु दुर्गम मार्ग के कारण सैलानी यहाँ तक नहीं पहुँच पाते।
घोघरा जलप्रपात
पांडातराई के पास ग्राम घोघराकला में हाफ नदी पर बने इस छोटे प्रपात और यहाँ की चट्टानों की खूबसूरती पर्यटकों को लुभाती है। यहाँ उद्यान व बच्चों के मनोरंजन के साधन विकसित किए जा सकते हैं।
कांदावानी जलप्रपात
नेऊर-बाहपानी मार्ग पर कांदावानी से आगे बिजराटोला में स्थित यह प्रपात अपनी प्राकृतिक छटा के लिए जाना जाता है, जहाँ पहुँचने के लिए अंतिम 2 किलोमीटर की कच्ची पगडंडी तय करनी पड़ती है।
सराईदाह जलप्रपात
पोलमी से करीब 5 किलोमीटर घने जंगलों के बीच पगडंडियों और फिसलन भरे रास्तों को पार कर यहाँ पहुँचा जा सकता है। जंगलों के बीच स्थित यह बरसाती नाले का प्रपात अत्यंत मनोहारी है।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की प्राचीन गुफाएं
जलप्रपातों के अलावा पंडरिया ब्लॉक में कई प्राचीन गुफाएं भी मौजूद हैं, जो उचित संरक्षण के अभाव में अपनी पहचान तलाश रही हैं:
बम्हन्देई मंदिर व बुचीपारा गुफा
ब्लॉक मुख्यालय से मात्र 7 किलोमीटर दूर स्थित इन प्राचीन गुफाओं के बारे में कहा जाता है कि इनका मार्ग पहले भोरमदेव और पचराही की ओर जाता था।
देवसरा और भेड़ागढ़ गुफाएं
देवसरा की चट्टानों में बड़ी गुफा और मुख्यालय से 30 किमी दूर भेड़ागढ़ की गुफा क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक वैभव को दर्शाती हैं।
विकास की दरकार: सड़क, सुविधा और संरक्षण की आवश्यकता
इन सभी पर्यटन स्थलों के वन क्षेत्र के अंतर्गत आने के कारण, वन विभाग और शासन यदि मिलकर यहाँ पक्की सड़कें, आवागमन के रास्ते, सीढ़ियाँ और बुनियादी जनसुविधाएं विकसित कर दें, तो पंडरिया ब्लॉक न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि देश के पर्यटन मानचित्र पर एक चमकता हुआ नाम बन सकता है। इसके साथ ही, लगातार उजड़ते जंगलों को बचाने और बरसाती नदियों को कृत्रिम रूप से संवारने की दिशा में ठोस कदम उठाने की सख्त जरूरत है।






