रायपुर में बाल सुरक्षा और अधिकारों पर केंद्रित ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का आयोजन, 21 विद्यालयों में 42 न्यायाधीशों ने की शिरकत
अभियान का उद्देश्य: बच्चों को बाल संरक्षण कानूनों, व्यक्तिगत सुरक्षा, ऑनलाइन सतर्कता और उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना।
रायपुर प्रवक्ता.कॉम 28 अक्टूबर 26
बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए रायपुर और गरियाबंद जिलों में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का व्यापक स्तर पर आगाज किया गया है। ‘हर बच्चे का बचपन, हम सबकी जिम्मेदारी’ के संकल्प के साथ चलाए जा रहे इस अभियान के तहत रायपुर के 21 विद्यालयों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें 42 न्यायाधीशों ने सीधे विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें कानूनी अधिकारों और सुरक्षा के व्यावहारिक पाठ पढ़ाए।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वावधान में 10 अक्टूबर 2026 से आरंभ हुए इस देशव्यापी अभियान का मुख्य उद्देश्य नौनिहालों को उनके कानूनी अधिकारों और विपरीत परिस्थितियों में मिलने वाली सहायता से अवगत कराना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला न्यायाधीश श्री बलराम प्रसाद वर्मा के दिशा-निर्देशन में चल रहे इस अभियान के प्रथम चरण (26 से 31 अक्टूबर) के तहत स्कूली बच्चों को यह बारीकी से समझाया जा रहा है कि किसी भी प्रकार की असुरक्षा या शोषण की स्थिति में उन्हें चुप रहने के बजाय तुरंत किससे संपर्क करना चाहिए, शिकायत कैसे दर्ज करानी चाहिए तथा निःशुल्क विधिक सहायता कैसे प्राप्त की जा सकती है।

बहु-विभागीय समन्वय से तैयार की गई रूपरेखा
इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा साइबर क्राइम विभाग को शामिल करते हुए एक उच्चस्तरीय जिला स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया है।
कार्यक्रमों के दौरान बच्चों को निम्नलिखित मुख्य विषयों पर जागरूक किया जा रहा है—
मेरा बचपन, मेरा अधिकार’
‘कानून जानो, बचपन बचाओ’
सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन’ (ऑनलाइन सतर्कता)
‘बोलो, बताओ, बचाओ’
न बाल विवाह, न बाल शोषण’
नुक्कड़ नाटक और कला के माध्यम से संवाद
न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास विभाग के पॉक्सो सपोर्ट पर्सन, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति के सदस्यों और बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञों ने भी बच्चों से संवाद किया। वहीं, स्थानीय विधि महाविद्यालयों के प्राध्यापकों और विधि विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक, प्रश्नोत्तरी (क्विज़) और चित्रकला प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को सरल और रोचक शैली में बाल संरक्षण कानूनों की जानकारी दी।
निरंतर जारी रहेंगी गतिविधियां
जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित अभियान अवधि समाप्त होने के उपरांत भी विद्यालयों में बच्चों के बौद्धिक व मानसिक विकास तथा बाल संरक्षण से जुड़ी जागरूकता गतिविधियां अनवरत रूप से जारी रहेंगी, ताकि छात्र-छात्राओं के लिए एक सुरक्षित, भयमुक्त और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।






