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बिलासपुर/रायपुर, 10 जून 2026
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के चिकित्सकों ने अपनी त्वरित निर्णय क्षमता और विशेषज्ञता का परिचय देते हुए एक 26 वर्षीय युवक को पुनर्जीवन प्रदान किया है। गंभीर रूप से घायल युवक के गले की कटी हुई श्वासनली की दो घंटे तक चली आपातकालीन सर्जरी कर डॉक्टरों ने उसे मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया।
क्या था मामला?
26 वर्षीय शादाब खान को अत्यंत नाजुक हालत में सिम्स के कैजुअल्टी विभाग में लाया गया था। उसके गले में गहरा घाव था और श्वासनली (Laryngotracheal Injury) कट जाने के कारण सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही थी। मरीज का ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिर रहा था, जो कि एक जानलेवा स्थिति थी।
तैयारी और चुनौती: ट्रेकियोस्टॉमी से सुरक्षित किया श्वास मार्ग
मरीज की गंभीरता को देखते हुए ईएनटी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. आरती पाण्डेय, सह प्राध्यापक डॉ. विद्याभूषण साहू और सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल ने बिना समय गंवाए उसे ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट किया।
- आपातकालीन ट्रेकियोस्टॉमी: डॉक्टरों ने सबसे पहले ट्रेकियोस्टॉमी प्रक्रिया अपनाकर मरीज का श्वास मार्ग सुरक्षित किया, जिससे ऑक्सीजन लेवल सामान्य हो सका।
- जटिल मरम्मत: इसके बाद दो घंटे तक चली सर्जरी में श्वासनली, मांसपेशियों, फैशियल लेयर और त्वचा को पांच परतों में जोड़कर पुनर्स्थापित किया गया।
टीम वर्क की जीत
इस जीवनरक्षक सर्जरी में एनेस्थीसिया विभाग की भूमिका निर्णायक रही। विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. मधुमिता मूर्ति और सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रशांत कुमार पैंकरा के नेतृत्व में एनेस्थीसिया टीम ने पूरे ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखा।
आगे का उपचार
सर्जरी के बाद हुई जांचों में मरीज के सिर की हड्डी में फ्रैक्चर और मस्तिष्क के भीतर रक्तस्राव (इंट्राक्रेनियल हेमरेज) की पुष्टि हुई। सिम्स में न्यूरोसर्जन की उपलब्धता न होने के कारण, मरीज को प्राथमिक उपचार और स्थिरता प्रदान करने के बाद बेहतर इलाज हेतु रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय (मेकाहारा) रेफर कर दिया गया है।
डीन ने दी बधाई
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा, “यह सफलता हमारे चिकित्सकों के समर्पण और दक्षता का प्रमाण है। सिम्स आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।”






