जनजातीय समागम से अमित शाह का बड़ा संदेश: आदिवासियों पर लागू नहीं होगा समान नागरिक संहिता (UCC)
गृह मंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा आदिवासियों के राजनीतिक और सामाजिक सशक्तीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय ही छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे जनजाति-बहुल राज्य बने।
दिल्ली /रायपुर प्रवक्ता.कॉम 25 मई 2026
राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित विशाल ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ में देश भर के आदिवासियों का महाकुंभ उमड़ पड़ा। इस महाधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शामिल हुए। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पूर्व मंत्री गणेश राम भगत सहित देश भर के 500 से अधिक जनजातीय समुदायों के लाखों प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ के सरगुजा और अन्य संभागों से करीब 15 से 20 हजार आदिवासी विशेष ट्रेनों और माध्यमों से इस समागम में शामिल होने दिल्ली पहुंचे।

UCC (समान नागरिक संहिता) पर अमित शाह का बड़ा बयान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आदिवासियों के मन से डर दूर करते हुए मंच से बड़ा आश्वासन दिया। उन्होंने कहा:
”देश में एक षड्यंत्र चलाया जा रहा है कि यूसीसी (UCC) आने से आदिवासियों को उनकी संस्कृति, परंपराओं और जीने के अधिकार से वंचित कर दिया जाएगा। मैं नरेंद्र मोदी सरकार के गृह मंत्री के नाते देश के सभी आदिवासी भाइयों-बहनों को भरोसा देता हूं कि UCC का कोई भी प्रावधान आदिवासियों पर लागू नहीं होगा। यह कानून आदिवासियों के अधिकारों, रीति-रिवाजों और परंपराओं का अतिक्रमण बिल्कुल नहीं करेगा।”
उन्होंने उदाहरण दिया कि भाजपा शासित उत्तराखंड और गुजरात ने पहले ही आदिवासियों को UCC के दायरे से बाहर रखने के विशेष प्रावधान किए हैं।
धर्मांतरण और ‘डी-लिस्टिंग’ पर कड़ा रुख

समागम में जनजातीय सुरक्षा मंच की ओर से मूल परंपराओं को छोड़ने वाले और धर्मांतरित आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची से बाहर (डी-लिस्टिंग) करने की मांग प्रमुखता से उठी। इस पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत का संविधान हर व्यक्ति को अपने मूल पंथ और आस्था के साथ सम्मान से जीने का अधिकार देता है। लालच, प्रलोभन या बलपूर्वक किसी का भी धर्मांतरण नहीं कराया जा सकता। उन्होंने आदिवासियों से अपनी संस्कृति, जल, जंगल, जमीन और मूल आस्था की रक्षा करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
छत्तीसगढ़ और ओडिशा को लेकर बोले शाह

गृह मंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा आदिवासियों के राजनीतिक और सामाजिक सशक्तीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय ही छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे जनजाति-बहुल राज्य बने। उन्होंने गर्व से कहा कि आज छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों ही राज्यों में आदिवासी समाज से आने वाले मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय) राज्य का नेतृत्व कर रहे हैं। इसके साथ ही देश को पहली आदिवासी राष्ट्रपति (द्रौपदी मुर्मू) देने का काम भी मोदी सरकार ने किया।
नक्सलवाद का खात्मा और पेसा (PESA) कानून
अमित शाह ने मंच से घोषणा की कि सरकार ने दशकों पुरानी नक्सलवाद की समस्या को लगभग समाप्त कर दिया है, जिसने 40 हजार से अधिक आदिवासियों की जान ली थी। इसके अलावा, आदिवासियों को उनके अधिकार देने के लिए बनाए गए ‘पेसा कानून’ के नियमों का संथाली, गोंडी, भीली और मुंडारी जैसी स्थानीय जनजातीय भाषाओं में अनुवाद कराया गया है ताकि जमीनी स्तर पर इसका लाभ मिल सके।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी रखा अपना पक्ष
समागम में पहुंचे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी जनजातीय अस्मिता और संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन धरा हमेशा से जनजातीय गौरव की प्रतीक रही है और राज्य सरकार आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस समागम की शुरुआत दिल्ली के पांच अलग-अलग स्थानों (राजघाट, रामलीला मैदान आदि) से निकली भव्य सांस्कृतिक शोभायात्राओं के साथ हुई, जो लाल किला मैदान में आकर महाकुंभ में तब्दील हो गई। छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्य प्रस्तुत कर अपनी सांस्कृतिक विविधता का शानदार प्रदर्शन किया।






