Breaking NewsNew delhiSupreme court
Trending

सुप्रीम कोर्ट से बड़ी खबर: NEET-UG परीक्षा रद्द करने और दोबारा टेस्ट के फैसले को चुनौती, SC ने जुलाई तक टाली सुनवाई

NEET-UG Re-Test: 'प्रशासन की नाकामी की सजा 22 लाख छात्र क्यों भुगतें?' एनटीए के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, सुनवाई टली

प्रवक्ता.कॉम 17 जून 26

Join WhatsApp

नई दिल्ली:

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा घटनाक्रम हुआ। कोर्ट ने 3 मई को आयोजित हुई नीट परीक्षा को रद्द करने और आगामी 21 जून को होने वाली राष्ट्रव्यापी दोबारा परीक्षा (Re-test) के नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।

​चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहाना की पीठ ने निर्देश दिया कि इस मामले को जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष लिस्ट किया जाए, जो पहले से ही नीट परीक्षा से जुड़ी अन्य याचिकाओं की सुनवाई कर रही है। अब इस मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की नियमित छुट्टियां खत्म होने के बाद जुलाई में होगी।

​याचिका में क्या दी गई दलील?

​यह याचिका स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) की पूर्व सहायक महानिदेशक डॉ. मंगला कोहली द्वारा दायर की गई थी। याचिका में मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें उठाई गई हैं:

निर्दोष छात्रों को सजा क्यों? याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप बेहद गंभीर हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसकी वजह से देश के करीब 22 लाख उन ईमानदार (Bona fide) छात्रों के भविष्य की बलि नहीं दी जा सकती, जिनका इस गड़बड़ी से कोई लेना-देना नहीं है।

प्रशासनिक विफलता का हर्जाना छात्र क्यों भुगतें? एनटीए की प्रशासनिक और संस्थागत विफलता के कारण पूरी परीक्षा को ही रद्द कर देना और फिर से परीक्षा आयोजित करना पूरी तरह से मनमाना और अत्यधिक है।

सीमित स्तर पर थी गड़बड़ी: याचिकाकर्ता का तर्क है कि जांच के अनुसार पेपर लीक और धांधली कुछ खास केंद्रों, गिरोहों और चुनिंदा लोगों तक ही सीमित थी, इसलिए पूरे देश की परीक्षा रद्द करना गलत है।

​डिजिटल रिफॉर्म्स की भी मांग

इस याचिका में केवल परीक्षा रद्द करने के फैसले को ही चुनौती नहीं दी गई है, बल्कि भविष्य के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़े सुधारों की मांग की गई है। इसमें प्रश्नपत्रों के एन्क्रिप्टेड (डिजिटल रूप से सुरक्षित) वितरण, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन, एआई (AI) आधारित निगरानी प्रणाली और कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) जैसे कड़े सुरक्षा उपाय लागू करने के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग भी शामिल है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button